गुवाहाटी हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, असम सरकार पर लगाया जुर्माना

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मुजाम्मेल हक बनाम असम राज्य मामले में 33 पेज का आदेश जारी किया है। यह आदेश 3 सितंबर 2026 को दिया गया है, जिसमें मुजाम्मेल हक को दो लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। अदालत ने पाया कि राज्य के अधिकारियों ने उनकी पत्नी मुमताज बेगम को नागरिकता के मामले में नए फैसले को चुनौती देने का मौका दिए बिना ही बांग्लादेश भेज दिया था।
मुमताज बेगम को जून 2019 में नगांव के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित किया गया था। 20 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के उस फैसले को रद्द कर दिया था क्योंकि ट्रिब्यूनल ने चार में से तीन गवाहों के बयानों पर विचार नहीं किया था और मामले को नए फैसले के लिए वापस भेज दिया था। 30 मई 2026 को ट्रिब्यूनल ने नया फैसला सुनाया। उसी दोपहर बॉर्डर पुलिस ने मुमताज को ट्रिब्यूनल परिसर के पास से हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें जुरिया, नगांव और गोलपाड़ा के मटिया होल्डिंग एरिया से होते हुए श्रीभूमि ले जाया गया। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के अनुसार, 13 जून को उन्हें सौंप दिया गया और 13-14 जून 2026 की रात को उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया।
हाईकोर्ट ने पाया कि अधिकारियों ने जानबूझकर ट्रिब्यूनल के फैसले की प्रमाणित कॉपी देने में देरी की। इससे मुमताज या उनके परिवार को देश से बाहर निकाले जाने से पहले कानूनी समीक्षा की मांग करने का मौका नहीं मिला। अदालत ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मुमताज या उनके परिवार के किसी वयस्क सदस्य को हिरासत या देश से निकाले जाने की कोई जानकारी दी गई थी। यह दो लाख रुपये का भुगतान संबंधित अधिकारी को आदेश की प्रमाणित कॉपी और याचिकाकर्ता के बैंक विवरण मिलने के 60 दिनों के भीतर करना होगा।
इस फैसले के बाद हाईकोर्ट ने पूरे राज्य में नए सुरक्षा नियम लागू किए हैं। अब बॉर्डर के सीनियर सुपरिंटेंडेंट या सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी घोषित किए गए लोगों को हिरासत में लेने से पहले ट्रिब्यूनल के फैसले की फ्री कॉपी मिले और किसी भी जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर करने से पहले परिवार के एक वयस्क सदस्य को सूचना दी जाए। असम के गृह और राजनीतिक विभाग को 30 मई के फैसले के तैयार होने के समय की जांच करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें ट्रिब्यूनल के कंप्यूटर की जांच भी शामिल है। विदेश मंत्रालय को इस मामले में पक्षकार बनाया गया है ताकि मुमताज को ढूंढने और उन्हें वापस लाने में मदद मिल सके। इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को तय की गई है।