गया पितृपक्ष मेला: रेलवे ने दी ट्रेनों की सौगात, ई-पिंडदान की भी सुविधा!

बिहार के गया में आयोजित होने वाला विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला अब अपने पूरे शबाब पर है। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस मेले में पिंडदान करने के लिए देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उनकी सुविधा को देखते हुए रेलवे प्रशासन और बिहार पर्यटन विभाग ने विशेष इंतजाम किए हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे की बड़ी तैयारी
गया में उमड़ रही भीड़ को देखते हुए पूर्व मध्य रेलवे ने यात्रा को सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दिल्ली से गया आने वाले यात्रियों के लिए कई प्रमुख ट्रेनें उपलब्ध हैं, जिनमें महाबोधि एक्सप्रेस (12397/12398), सियालदह राजधानी (12313/12314), पुरुषोत्तम एक्सप्रेस (12801/12802) और नंदनकानन एक्सप्रेस (12815/12816) शामिल हैं। ये ट्रेनें नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और आनंद विहार स्टेशनों से संचालित हो रही हैं।
मेले के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ विशेष बदलाव भी किए गए हैं:
- महाबोधि एक्सप्रेस: मेला अवधि के दौरान महाबोधि एक्सप्रेस (12397) गया जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर छह से प्रस्थान करेगी।
- विशेष ठहराव: बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस, पलामू एक्सप्रेस और विभिन्न मेमू (MEMU) सेवाओं सहित कुल 17 ट्रेनों को पुनपुन घाट और अनुग्रह नारायण स्नान घाट पर दो मिनट का अस्थायी ठहराव दिया गया है।
- विशेष ट्रेनें: रानी कमलापति (भोपाल)/जबलपुर से गया के बीच विशेष ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं। भोपाल से ये ट्रेनें 27 सितंबर, 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर को रवाना होंगी, जबकि वापसी की यात्रा 30 सितंबर, 5 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को निर्धारित है।
गया जंक्शन पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त टिकट काउंटर और कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं। मेले के पहले ही दिन लगभग 7,000 से अधिक तीर्थयात्री गया पहुंचे, जो इस आयोजन की भव्यता को दर्शाता है।
हवाई यात्रा हुई महंगी, ई-पिंडदान का विकल्प भी तैयार
जहाँ एक ओर रेलवे ने व्यवस्थाएं बढ़ाई हैं, वहीं दूसरी ओर हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की जेब पर बोझ बढ़ गया है। दिल्ली से गया के बीच हवाई किराए में लगभग 100% की वृद्धि देखी गई है। सामान्य दिनों में जो किराया 6,000 से 7,000 रुपये के बीच होता था, वह अब बढ़कर 16,000 रुपये तक पहुंच गया है।
बिहार पर्यटन विभाग ने उन लोगों के लिए भी एक अनूठा विकल्प पेश किया है जो व्यक्तिगत रूप से गया नहीं आ सकते। विभाग ने 'ई-पिंडदान' (e-pind-daan) सेवा शुरू की है।
ई-पिंडदान सेवा की मुख्य बातें:
- लागत: इस डिजिटल सेवा की कीमत 23,000 रुपये (GST सहित) तय की गई है।
- सुविधाएं: इस पैकेज में पूजा सामग्री, पुरोहित की सेवा और पूरी प्रक्रिया का वीडियो डॉक्यूमेंटेशन शामिल है।
- बुकिंग: श्रद्धालु पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट tourism.bihar.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।
पिंडदान के लिए गया के प्रमुख धार्मिक स्थल
गया में पितृ तर्पण और पिंडदान के लिए कुल 48 प्रमुख वेदियों का महत्व है। श्रद्धालु मुख्य रूप से निम्नलिखित स्थानों पर अपनी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं:
- विष्णुपद मंदिर: यह पिंडदान का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है।
- फल्गु नदी: पवित्र स्नान और अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध।
- अक्षयवट: पितरों की शांति के लिए यहाँ विशेष पूजा की जाती है।