वैश्विक बाजार में मखाना बना सुपरफूड, भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक

Ghazala Saheb20 August 20262 min read2 viewsBihar
वैश्विक बाजार में मखाना बना सुपरफूड, भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक

भारतीय कृषि क्षेत्र में पिछले कुछ दशकों में कई पारंपरिक फसलों ने स्थानीय पहचान से निकलकर वैश्विक स्तर पर अपनी खास धाक जमाई है और इस श्रृंखला में सबसे नया और क्रांतिकारी नाम मखाना यानी फॉक्स नट का है। मखाना आज वैश्विक स्वास्थ्य और पोषण बाज़ार में एक प्रीमियम सुपरफूड के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसकी मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों पर पहुँच गई है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश है और यह बदलाव बिहार जैसे राज्यों के ग्रामीण अर्थशास्त्र और किसानों की आय में सुधार ला रहा है।

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड और सरकारी योजनाएं

केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई घोषणा के तहत 15 सितंबर 2025 को बिहार में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का औपचारिक शुभारंभ हुआ है। सरकार ने 2025-26 से 2030-31 की अवधि के लिए 476.03 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जो मखाने की वैल्यू-चेन को एकीकृत कर रहा है। यह बोर्ड अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीजों का वितरण, मशीनीकरण, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात संवर्धन पर काम कर रहा है।

उत्पादन और बिहार का योगदान

वैश्विक मखाना बाज़ार पर भारत का एक छत्र साम्राज्य है और दुनिया भर में आपूर्ति होने वाले मखाने का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से पहुंच रहा है। देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग तीन चौथाई यानी 75 प्रतिशत है, जहां कोसी और मिथिला सीमांचल क्षेत्र मखाने की खेती का गढ़ बन चुके हैं। साल 2024–25 के दौरान भारत में कुल मखाना उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन रहा था।

उत्पादन में वृद्धि और जीआई टैग

वर्ष 2025-26 में भारत का मखाना उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन तक पहुँचने का अनुमान है और बिहार ने अकेले 60 हजार मीट्रिक टन मखाने का उत्पादन किया है। बिहार के मिथिला क्षेत्र में उत्पादित मखाने को मिथिला मखाना के रूप में भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्रदान किया गया है, जिससे इसकी प्रामाणिकता और प्रीमियम छवि स्थापित हुई है। दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र ने मैनुअल मेहनत को कम करने के लिए कई आधुनिक मशीनें विकसित की हैं।

निर्यात और वैश्विक बाजार

भारत आज अपने कुल मखाना उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत यानी करीब 25 हजार मीट्रिक टन तक निर्यात करता है। वर्ष 2025 में विदेश व्यापार महानिदेशालय ने पॉप्ड मखाना के लिए अलग एचएसएन कोड जारी किया और वर्ष 2025-26 में भारत ने 19,296.08 लाख रुपये मूल्य के 7,264.89 मीट्रिक टन मखाना उत्पादों का निर्यात किया। अमेरिका 40 प्रतिशत, कनाडा 20 प्रतिशत और संयुक्त अरब अमीरात 17 प्रतिशत हिस्सा खरीदते हैं।

घरेलू खपत और स्वास्थ्य लाभ

भारत में पॉप्ड मखाने की औसत मासिक खपत 3 हजार से 3,500 मीट्रिक टन है, जो त्योहारों के सीजन में बढ़कर 5 हजार मीट्रिक टन तक पहुँच जाती है। मखाने में प्रति 100 ग्राम मात्र 0.33 ग्राम वसा, उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और अमीनो एसिड होता है, तथा ग्लाइसेमिक लोड कम होने के कारण यह डायबिटीज के मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

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