गोल्डन चारीट ट्रेन का किराया होगा कम! सीएम शिवकुमार का बड़ा ऐलान
कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने गोल्डन चारीट लग्जरी ट्रेन के किराए में कमी का संकेत दिया है ताकि आम लोग भी राज्य की विरासत देख सकें।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि राज्य सरकार गोल्डन चारीट ट्रेन का किराया कम करने पर विचार कर रही है। यह कदम विशेष रूप से ऑफ-सीजन के दौरान उठाया जा सकता है, ताकि आम नागरिक भी राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का शानदार अनुभव कर सकें।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने मैजेस्टिक और केंगेरी रेलवे स्टेशनों पर मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य कर्नाटक के पर्यटन स्थलों को प्रमोट करना और नए रोजगार के अवसर पैदा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य इस लग्जरी सेवा से मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इसमें कोई आर्थिक नुकसान न हो।
शिवकुमार ने कहा कि पर्यटन विभाग की 'कर्नाटक दर्शन' योजना, जो पहले बीच में रुक गई थी, उसे सरकार आने के बाद पर्यटन मंत्री के.जे. जॉर्ज ने फिर से शुरू और बेहतर बनाया है। इसी कड़ी में प्रतिष्ठित 'गोल्डन चारीट' को भी नए रूट और आधुनिक सुविधाओं के साथ पुनर्जीवित किया गया है।
'ज्वेल्स ऑफ द साउथ' और नए टूर पैकेज
पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने एक नया टूर सर्किट भी तैयार किया है, जिसे 'ज्वेल्स ऑफ द साउथ' नाम दिया गया है। यह रूट हम्पी, महाबलीपुरम, मैसूरु, बेंगलुरु, कोचीन और चेटिनाड जैसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों को आपस में जोड़ता है।
इसके अलावा, यात्रियों के लिए 'ड्रीम्स ऑफ कर्नाटक' नामक एक चार दिवसीय विशेष टूर पैकेज भी तैयार किया गया है। इस पैकेज से जुड़ी विस्तृत जानकारी आने वाले दिनों में साझा की जाएगी।
चलती-फिरती फाइव स्टार लग्जरी
गोल्डन चारीट केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता लग्जरी अनुभव है। मुख्यमंत्री ने ट्रेन की सुविधाओं की सराहना करते हुए बताया कि इसमें यात्रियों के लिए विश्वस्तरीय इंतजाम हैं:
- दो बड़े रेस्टोरेंट, जिनमें लगभग 80 यात्रियों के बैठने की क्षमता है।
- यात्रियों की सेवा के लिए लगभग 60 समर्पित कर्मचारियों की टीम।
- स्पा, जिम और शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन के बेहतरीन विकल्प।
- आरामदायक रात बिताने के लिए शानदार आवास की व्यवस्था।
"यह ट्रेन कर्नाटक के पर्यटन की एक अमूल्य संपत्ति है। हम चाहते हैं कि यह केवल दूसरे राज्यों के अमीर पर्यटकों या संपन्न वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे कर्नाटक के लोग भी इसका बड़े पैमाने पर लाभ उठा सकें।" — डीके शिवकुमार