गौरीशंकर भगत नेत्रदान: परिजनों के फैसले से रोशन हुई तीन जिंदगियां

अररिया के कारोबारी गौरीशंकर भगत के निधन के बाद परिजनों ने नेत्रदान कर तीन लोगों को रोशनी दी। संस्थाओं ने परिजनों को सम्मानित किया।

Ghazala Saheb6 November 20262 min read0 viewsBihar
गौरीशंकर भगत नेत्रदान: परिजनों के फैसले से रोशन हुई तीन जिंदगियां

अररिया के फारबिसगंज में गौरीशंकर भगत नेत्रदान की मिसाल पेश करते हुए उनके परिजनों ने समाज के सामने एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रसिद्ध कारोबारी स्वर्गीय गौरीशंकर भगत के निधन के बाद उनके परिवार द्वारा लिए गए इस पुनीत फैसले से तीन लोगों के जीवन में रोशनी आने वाली है।

संस्थाओं ने परिजनों को किया सम्मानित

दधीचि देहदान समिति और तेरापंथ युवक परिषद चक्षुदान समिति की ओर से स्वर्गीय भगत के आवास पर एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान परिजनों के इस साहसी और नेक निर्णय के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय भगत की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर की गई, जिसके बाद आभार पत्र का वाचन किया गया।

समिति की ओर से उनके पुत्र विकास भगत, नितिन भगत, पुत्रवधू निधि भगत, रीता भगत, सुपुत्री सीमा गुप्ता, स्वाति जायसवाल और किशोर भगत सहित अन्य परिजनों को शॉल और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उन्हें स्मृति चिह्न और आभार पत्र भी प्रदान किए गए।

बिहार में नेत्रदान के क्षेत्र में फारबिसगंज की बड़ी उपलब्धि

दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष अजातशत्रु अग्रवाल ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पटना के बाद फारबिसगंज ही बिहार का दूसरा ऐसा शहर है, जहाँ नेत्रदान का कार्य सबसे अधिक प्रभावी ढंग से हो रहा है।

"मृत्यु के बाद शरीर नश्वर है और मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन नेत्रदान के माध्यम से पुण्यात्मा का वास बना रहता है। नेत्रहीन को मिली रोशनी के माध्यम से दिवंगत आत्मा की दुआएं हमेशा परिजनों के साथ रहती हैं।"

अग्रवाल ने यह भी बताया कि अब तक शहर में 28 सफल नेत्रदान हो चुके हैं, जिससे पांच दर्जन से अधिक नेत्रहीनों का जीवन रोशन हुआ है।

नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों का हुआ खंडन

नेत्रदान को लेकर समाज में फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए स्वर्गीय भगत के पुत्र नितिन भगत ने भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेत्रदान की प्रक्रिया में पूरी आँख नहीं निकाली जाती, बल्कि केवल कॉर्निया ही लिया जाता है।

उन्होंने इस नेक कार्य में सहयोग देने के लिए दधीचि देहदान समिति, तेरापंथ युवक परिषद चक्षुदान समिति और कलवार सेवा ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर बछराज राखेचा, मांगीलाल गोलछा, राहुल ठाकुर, विनोद सेठिया, मदन मोहन कनौजिया और डॉ. अनुज प्रभात सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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