'वंदे मातरम' पर कर्नाटक सरकार को राज्यपाल की नसीहत: दो छंदों तक सीमित करने के आदेश पर उठाए सवाल

Ghazala Saheb22 September 20262 min read1 viewBihar
'वंदे मातरम' पर कर्नाटक सरकार को राज्यपाल की नसीहत: दो छंदों तक सीमित करने के आदेश पर उठाए सवाल

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य सरकार के एक महत्वपूर्ण फैसले पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। मामला राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन से जुड़ा है, जिसे लेकर राज्य सरकार ने एक नया आदेश जारी किया था।

क्या है विवाद की जड़?

कर्नाटक सरकार ने 8 सितंबर, 2026 को एक सरकारी आदेश जारी किया था, जिसमें यह निर्देश दिया गया था कि राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का गायन सामान्यतः केवल इसके पहले दो छंदों तक ही किया जाएगा। राज्यपाल ने इस निर्णय को केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के विपरीत बताया है।

राज्यपाल गहलोत ने 21 सितंबर, 2026 को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को लिखे एक पत्र में इस आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026' का उल्लंघन करता है।

संविधान और गृह मंत्रालय के नियमों का उल्लंघन

राज्यपाल ने अपने पत्र में कई कानूनी और संवैधानिक पहलुओं को रेखांकित किया है, जो इस मामले को पेचीदा बनाते हैं:

  • गृह मंत्रालय के निर्देश: गृह मंत्रालय ने 'वंदे मातरम' और राष्ट्रगान के संबंध में विशिष्ट आदेश जारी किए हैं। सामूहिक गायन के अवसरों पर आधिकारिक संस्करण का ही उपयोग किया जाना चाहिए, जिसमें राज्य सरकार को इसे छोटा करने की अनुमति नहीं है।
  • संवैधानिक सीमाएं: राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 162, 256 और 257(1) का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार उन विषयों पर स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकती जो उसके विधायी अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।
  • राज्य सूची का विषय नहीं: राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण का विनियमन राज्य सूची का विषय नहीं है।
  • कानूनी सुरक्षा: संसद ने 2026 के संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय गीत को वैधानिक सुरक्षा प्रदान की है, जिसमें इसके गायन में बाधा डालने या इसे रोकने को अपराध माना गया है।

टकराव और मुकदमेबाजी से बचने की चेतावनी

राज्यपाल ने सरकार को सलाह दी है कि वह इस बात की जांच करे कि क्या दो छंदों तक सीमित करने का यह प्रतिबंध कानूनी रूप से टिकाऊ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र के प्रोटोकॉल और राज्य के निर्देशों के बीच टकराव से बचने के लिए यह आवश्यक है।

"इस तरह के पुनर्विचार से राज्य के निर्देशों और केंद्र के प्रोटोकॉल के बीच अनावश्यक संघर्ष को टाला जा सकेगा और भविष्य में होने वाली संवैधानिक मुकदमेबाजी से बचा जा सकेगा।"

राज्यपाल ने सरकार से आग्रह किया है कि वे संवैधानिक मर्यादा और राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए केंद्र के मौजूदा निर्देशों का पालन करें। इस पत्र की प्रतियां मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव और सरकार के सचिव को भी भेजी गई हैं।

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