GST में बड़ा फेरबदल: 5 बड़े राज्यों को मिली स्थायी सीट

GST ढांचे के तहत एक नई GST स्थायी समिति (Standing Committee) का गठन किया गया है, जिसमें देश के पांच बड़े राज्यों को स्थायी सदस्यता दी गई है। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु इस समिति के स्थायी सदस्य होंगे।
समिति का नया ढांचा और राज्यों का चयन
इस नई समिति में कुल 12 राज्यों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। राज्यों के चयन के लिए एक विशेष वर्गीकरण किया गया है:
- 5 बड़े राज्य: इन्हें समिति में स्थायी सदस्यता दी गई है।
- 4 मध्यम राज्य: इन्हें रोटेशन के आधार पर शामिल किया जाएगा।
- 3 छोटे राज्य: इन्हें भी रोटेशन के आधार पर जगह मिलेगी।
स्थायी सदस्यों के अलावा, अन्य राज्यों के लिए सीटें रोटेशन के आधार पर भरी जाएंगी, जहां हर दो साल में राज्यों का बदलाव होगा।
टैक्स बेस बढ़ाने पर सरकार का फोकस
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से जीएसटी टैक्स बेस बढ़ाने का आग्रह किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार राज्यों को डेटा एनालिटिक्स और तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी। अधिकारियों का कहना है कि दर युक्तिकरण (rate rationalisation) और प्रक्रियात्मक सरलीकरण का काम अब पूरा हो चुका है, इसलिए अब मुख्य ध्यान अधिक से अधिक व्यवसायों को टैक्स के दायरे में लाने पर है।
वर्तमान में भारत में 1.7 करोड़ पंजीकृत करदाता हैं। सरकार का मानना है कि टैक्स बेस का विस्तार करने से राजस्व में वृद्धि होगी। इसके लिए रिटर्न फाइलिंग और इनवॉइस मिलान की प्रक्रियाओं में सुधार किया जाएगा ताकि टैक्स चोरी को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
B2C ई-इनवॉइसिंग और नई तकनीक का इस्तेमाल
टैक्स प्रणाली को और अधिक सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी में है। संभावना जताई जा रही है कि 1 अप्रैल से राज्यों को बिजनेस-टू-कंज्यूमर (B2C) सेगमेंट में ई-इनवॉइसिंग लागू करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
- GSTN का नया ऐप: GSTN अपने पोर्टल के हिस्से के रूप में एक B2C ऐप लॉन्च करेगा, जहां ग्राहक आसानी से इनवॉइस जेनरेट कर सकेंगे।
- व्यवसायों को प्रोत्साहन: सरकार व्यवसायों पर दबाव डालने के बजाय उन्हें इस नई प्रणाली की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहन (incentives) देगी।
- बेहतर डेटा ट्रैकिंग: B2C ई-इनवॉइसिंग से सप्लायर से लेकर अंतिम विक्रेता तक, पूरी आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) का सटीक डेटा उपलब्ध हो सकेगा।