सरकारी नौकरी का नया फॉर्मूला: 15 साल की सेवा और हर परिवार को एक जॉब!

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सरकारी नौकरियों के स्वरूप को बदलने के लिए एक क्रांतिकारी विचार पेश किया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि यदि सरकारी कर्मचारियों की सेवा अवधि को 35 साल से घटाकर 10 से 15 साल कर दिया जाए, तो इससे बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो सकता है और प्रत्येक परिवार को कम से कम एक सरकारी नौकरी सुनिश्चित की जा सकती है।
हर परिवार को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अभ्यर्थियों के साथ एक संवाद के दौरान कुमारस्वामी ने यह विचार साझा किया। उन्होंने कहा, "वर्तमान में एक व्यक्ति सरकारी सेवा में लगभग 35 वर्षों तक रहता है। सोचिए, अगर हम इस अवधि को 10, 15 या 20 साल तक सीमित कर दें, तो इससे कितने ही नए लोगों के लिए अवसर पैदा होंगे।"
प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:
- सेवा अवधि में कटौती: नौकरी की अवधि को 35 साल से घटाकर 10-15 साल करने का प्रस्ताव।
- पेंशन और लाभ: निर्धारित अवधि पूरी करने वाले कर्मचारियों को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ मिलते रहेंगे।
- उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि समाज के हर घर में कम से कम एक सरकारी कर्मचारी हो।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभी केवल एक विचार है जिस पर सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता है, और भविष्य में इसे लागू करने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।
KPSC पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
इस दौरान कुमारस्वामी ने KPSC की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आयोग को "भ्रष्टाचार का अड्डा" करार देते हुए आरोप लगाया कि वहां नौकरियों की बिक्री की जा रही है। उन्होंने सहायक कार्यकारी इंजीनियरों, पशु चिकित्सा विभाग और कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (KAS) की नियुक्तियों में अनियमितताओं, पक्षपात और जातिगत आधार पर नियुक्तियों का मुद्दा उठाया।
"KPSC, जिसे पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए, वह भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है।"
छात्रों का दर्द: "भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है"
संवाद के दौरान बेरोजगार उम्मीदवारों ने अपनी पीड़ा भी साझा की। उत्तर कर्नाटक के एक छात्र ने बताया कि कैसे छात्र तैयारी के लिए बेंगलुरु आते हैं और रहने के खर्च के साथ-साथ अनिश्चितता के बीच संघर्ष करते हैं।
अभ्यर्थियों की मुख्य शिकायतें:
- परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय न मिलना।
- प्रश्न पत्रों में गलतियां और OMR शीट के साथ छेड़छाड़ के आरोप।
- योग्यता मानदंडों और परीक्षा कार्यक्रमों को लेकर लगातार भ्रम की स्थिति।
- कोर्ट केसों के कारण भर्ती प्रक्रियाओं का बार-बार रुकना।
छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या भर्ती प्रक्रिया को कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) को सौंपने से समस्या का समाधान होगा, क्योंकि उनके अनुसार असली समस्या आयोग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी है।