हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: वेतन और पेंशन बकाया किस्तों में नहीं, पूरा मिलेगा; 6% ब्याज का भी आदेश

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के वेतन और पेंशन बकाया को किस्तों में देने के नियम को रद्द कर दिया है। अब सरकार को 6% ब्याज भी देना होगा।

Ghazala Saheb1 November 20262 min read0 viewsBihar
हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: वेतन और पेंशन बकाया किस्तों में नहीं, पूरा मिलेगा; 6% ब्याज का भी आदेश

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने सरकार के उस प्रावधान को पूरी तरह से रद्द कर दिया है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के संशोधित वेतन और पेंशन के बकाया (arrears) का भुगतान किस्तों में करने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय तंगी या प्रशासनिक विवेक के नाम पर कर्मचारियों के कानूनी और मौद्रिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।

'आर्थिक तंगी का बहाना नहीं चलेगा'

जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 31 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि एक बार जब सरकार संशोधित वेतन नियम अधिसूचित कर देती है, तो वह भुगतान में देरी करने के लिए प्रशासनिक आदेशों का सहारा नहीं ले सकती। अदालत ने हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के नियम 13 को अमान्य घोषित कर दिया है, जो सरकार को भुगतान के समय और तरीके को तय करने की असीमित शक्ति देता था।

सरकार ने तर्क दिया था कि केंद्र सरकार से राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) बंद होने के कारण राज्य पर वित्तीय दबाव है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा:

"वित्तीय बाधाओं का उपयोग उन वैध मौद्रिक देयताओं को विफल करने के लिए नहीं किया जा सकता जो वैधानिक नियमों से उत्पन्न होती हैं।"

ब्याज और भुगतान की समय सीमा

अदालत ने न केवल बकाया राशि का पूरा भुगतान करने का आदेश दिया, बल्कि कर्मचारियों को राहत देने के लिए 6% वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी निर्देश दिया है। यह ब्याज 1 जून, 2022 से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक देय होगा।

कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • मुख्य याचिकाकर्ता के लिए: पूरी संशोधित बकाया राशि का भुगतान दो समान किस्तों में किया जाएगा। पहली किस्त 15 दिसंबर, 2026 तक और दूसरी किस्त 28 फरवरी, 2027 तक दी जानी चाहिए।
  • ब्याज का लाभ: यह 6% ब्याज पूरी राशि पर लागू होगा, जिसमें किस्तों में मिलने वाला बकाया भी शामिल है।
  • अन्य कर्मचारियों के लिए: वे कर्मचारी और पेंशनभोगी जिन्होंने याचिका दायर नहीं की है, वे भी अपने मूल मौद्रिक लाभों के हकदार रहेंगे, लेकिन उन्हें 6% ब्याज का लाभ नहीं मिलेगा।

संवैधानिक अधिकारों की रक्षा

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ कर्मचारी के महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 300-A के तहत संरक्षित हैं। अदालत ने सरकार की उस कार्रवाई को भी रद्द कर दिया जिसमें संशोधित पेंशन, ग्रेच्युटी, कम्यूटेड पेंशन और छुट्टी के बदले मिलने वाले पैसे (leave encashment) को रोकने या विलंबित करने का प्रावधान था।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कुछ सेवानिवृत्त लोगों को लाभ देना और दूसरों को इंतजार कराना भेदभावपूर्ण है, क्योंकि वे सभी एक ही श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। इस फैसले से अब हिमाचल प्रदेश के हजारों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत के द्वार खुल गए हैं।

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