"सत्ता की भूख": उद्धव ठाकरे का चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग!

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। ठाकरे ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के हालिया फैसले लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन रहे हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित निर्णयों पर कई बार आपत्ति जताई है। ठाकरे ने कड़े शब्दों में कहा कि "ज्ञानेश कुमार का असली चेहरा अब देश के सामने आ गया है।"
पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह छीनने का आरोप
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग ने उनकी पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह उनके ही प्रतिद्वंद्वी गुट को सौंप दिया। उन्होंने इसे गद्दारों को फायदा पहुँचाने की कोशिश बताया। इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर का भी दावा किया:
- ठाकरे के अनुसार, चुनावों से ठीक पहले मतदाता सूची में लगभग 40 लाख नाम जोड़े गए थे।
- चुनाव संपन्न होते ही इन नामों को सूची से हटा दिया गया।
बैलट पेपर की मांग और लोकतंत्र बचाने की अपील
उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक जैसे राज्यों में यह सब केवल "सत्ता की भूख" के कारण हो रहा है। उन्होंने लोकतंत्र को बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने का सुझाव देते हुए कहा कि इन राज्यों में चुनाव फिर से बैलट पेपर के माध्यम से कराए जाने चाहिए।
"लोकतंत्र को बचाने के लिए आज हम सभी को एक साथ आना होगा। हम जनता के प्रतिनिधि हैं और अब जनता की आवाज को सुनना ही होगा।"
ठाकरे ने विपक्षी दलों से एकजुट होने का आह्वान किया ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्वाचित प्रतिनिधि जनता की आवाज को अनसुना न करें।