महिला अधिकारी का अपमान! IAS अधिकारी के खिलाफ NCW का कड़ा एक्शन

जम्मू-कश्मीर से एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां IAS अधिकारी महिला का अपमान करने के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया है। यह मामला तब गरमाया जब एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अपनी जूनियर महिला अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव, IAS कुमार राजीव रंजन, एक आधिकारिक समीक्षा बैठक के दौरान अपनी जूनियर महिला अधिकारी (सहायक निदेशक, JKAS) के साथ बेहद बदतमीजी करते नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो में उन्हें महिला अधिकारी को मौखिक रूप से अपमानित करते और धमकाते हुए देखा जा सकता है।
NCW की सख्त चेतावनी और कार्रवाई
NCW की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मामले की निष्पक्ष जांच करने और दोषी पाए जाने पर सख्त अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
आयोग ने निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया है:
- वीडियो की सत्यता की तुरंत जांच की जाए।
- कार्यस्थल पर उत्पीड़न और पेशेवर प्रतिशोध के खिलाफ कड़े सुरक्षा उपाय किए जाएं।
- महिला अधिकारी को पूर्ण सुरक्षा और समर्थन प्रदान किया जाए।
NCW ने इस मामले में 7 दिनों के भीतर 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) भी मांगी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि हर महिला अधिकारी कार्यस्थल पर सम्मान और गरिमा पाने की हकदार है और सत्ता का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक नेताओं ने जताई भारी नाराजगी
इस घटना ने राजनीतिक हलचल भी पैदा कर दी है। जम्मू-कश्मीर के प्रमुख नेताओं ने इस व्यवहार की कड़ी निंदा की है:
"उनका काम लोगों की बात सुनना है, लेकिन उन्होंने केवल 'बाहर जाओ, बाहर जाओ!' चिल्लाकर अपमान किया। यह अस्वीकार्य है। उन्हें जम्मू-कश्मीर से हटा दिया जाना चाहिए।" — फारूक अब्दुल्ला (JKNC प्रमुख)
वहीं, हजरतबल के विधायक सलमान सागर ने इस व्यवहार की तुलना 'ईस्ट इंडिया कंपनी' के दौर से की। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार लोगों के मन में कड़वाहट पैदा करता है और यह महसूस कराता है कि उन्हें अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
PDP प्रवक्ता मोहम्मद इकबाल तरबू ने इस घटना को पूरे IAS कैडर पर एक काला धब्बा बताया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने के बजाय जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि चाहे उमर अब्दुल्ला प्रशासन हो या एलजी प्रशासन, इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।