सुपौल में इंडिया गठबंधन का आक्रोश मार्च, मोदी-शाह के पुतले फूंके

Ghazala Saheb8 October 20262 min read0 viewsBihar
सुपौल में इंडिया गठबंधन का आक्रोश मार्च, मोदी-शाह के पुतले फूंके

बिहार के सुपौल जिले में गुरुवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया। इंडिया गठबंधन के आह्वान पर जिला मुख्यालय में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार के खिलाफ एक विशाल आक्रोश मार्च और विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त के पुतले फूंके।

लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश का आरोप

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधायक यदुवंश कुमार यादव ने केंद्र सरकार, भाजपा और चुनाव आयोग पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त ने मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की एक गहरी साजिश रची है।

पूर्व विधायक ने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे जनता के जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं और इस पूरी प्रक्रिया में जातिगत आधार पर भी भेदभाव किया गया है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान कोई स्वतंत्र प्रमाण पेश नहीं किया गया। उन्होंने युवाओं से अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने का आह्वान किया और कहा कि देश के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करना ही उनका मुख्य लक्ष्य है।

नेताओं ने उठाई कानूनी कार्रवाई की मांग

आक्रोश मार्च के दौरान महागठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं ने भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया। नेताओं ने मांग की कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से निम्नलिखित नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया:

  • संतोष सरदार (राजद जिलाध्यक्ष): उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार जनता के वोट से बनती है और चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
  • अनुपम कुमार (कांग्रेस जिलाध्यक्ष): उन्होंने चुनाव आयोग से चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब देने की मांग की।
  • जय नारायण यादव (माले जिला सचिव): उन्होंने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिया।
  • बिजेंद्र मुखिया (वीआईपी जिलाध्यक्ष): उन्होंने भी जनता के मताधिकार को सुरक्षित रखने की बात कही।

नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जनता के मताधिकार और जनादेश के साथ कोई भी खिलवाड़ हुआ, तो विपक्ष चुप नहीं बैठेगा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह आंदोलन और भी तेज किया जाएगा।

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