भारत की आर्थिक रफ्तार पर ब्रेक? विकास दर 5.5-6% तक गिरने की आशंका

Ghazala Saheb2 October 20262 min read0 viewsBihar
भारत की आर्थिक रफ्तार पर ब्रेक? विकास दर 5.5-6% तक गिरने की आशंका

भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर में गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है। CLSA की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में भारत की आर्थिक विकास दर घटकर 5.5 से 6 प्रतिशत के बीच रह सकती है। यह पहली छमाही में दर्ज की गई 7 से 7.5 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के मुकाबले काफी कम है।

क्यों धीमी हो सकती है विकास दर?

रिपोर्ट में इस संभावित सुस्ती के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में ही पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है, जिसे 'फ्रंट-लोडिंग' कहा जा रहा है। इसके अलावा, निम्नलिखित कारक भी विकास की गति को प्रभावित कर सकते हैं:

  • ग्रामीण क्षेत्र की सुस्ती: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कमजोरी विकास दर पर दबाव डाल सकती है।
  • प्रतिकूल आधार प्रभाव: पिछले साल के आंकड़ों का प्रभाव भी इस बार की वृद्धि को सीमित कर सकता है।
  • अनिश्चित आर्थिक माहौल: वैश्विक और घरेलू स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच संयुक्त राजकोषीय पूंजीगत व्यय की वृद्धि दर घटकर लगभग 4 प्रतिशत रह सकती है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 5 प्रतिशत थी।

सरकारी खर्च और राजकोषीय घाटे का दबाव

केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में भी नरमी आने की उम्मीद है। रिपोर्ट का अनुमान है कि सितंबर 2026 और मार्च 2027 के बीच केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय साल-दर-साल आधार पर 5 प्रतिशत से भी नीचे रह सकता है। हालांकि, रक्षा क्षेत्र के खर्च में बढ़ोतरी देखी जा सकती है, लेकिन रेलवे और सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों पर होने वाले खर्च के स्थिर रहने या उनमें गिरावट आने की संभावना है।

केंद्र की वित्तीय स्थिति में भी कुछ कमजोरी देखी गई है। वित्त वर्ष 2027 के पहले पांच महीनों में, राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बजट अनुमान का 41.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अगस्त में राजस्व में आई भारी गिरावट के कारण यह स्तर पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक दर्ज किया गया है।

राज्यों के खर्च में भी आई कमी

विकास की गति केवल केंद्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों के खर्च में भी कमी देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार:

  1. वित्त वर्ष 2027 के पहले पांच महीनों में राज्यों का पूंजीगत व्यय 10.4 प्रतिशत रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 15.4 प्रतिशत था।
  2. केंद्र और राज्यों के खर्च में इस कमी के कारण, संयुक्त राजकोषीय पूंजीगत व्यय की वृद्धि दर 13.2 प्रतिशत रही, जो पिछले साल 20 प्रतिशत थी।

CLSA ने निष्कर्ष निकाला है कि भविष्य का आर्थिक परिदृश्य काफी हद तक ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति और व्यापक आर्थिक वातावरण पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि कम राजस्व और आर्थिक अनिश्चितता को देखते हुए, केंद्र सरकार के लिए अपने खर्च के लक्ष्यों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी।

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