3 राष्ट्रीय एयरलाइंस की जरूरत, वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने का सुझाव
अडानी एयरपोर्ट्स के CEO अरुण बंसल ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने के लिए तीन राष्ट्रीय एयरलाइंस की जरूरत है।

भारत के बढ़ते विमानन बाजार और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए देश को 3 राष्ट्रीय एयरलाइंस की आवश्यकता है। यह महत्वपूर्ण सुझाव अडानी एयरपोर्ट्स के CEO अरुण बंसल ने दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए बाजार पूरी तरह खोलने से पहले भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी घरेलू एयरलाइंस बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
क्यों जरूरी है तीन बड़ी एयरलाइंस?
दिल्ली एविएशन इंडिया 2026 में बोलते हुए, बंसल ने कहा कि भारत के पास एक मजबूत घरेलू एयरलाइन इकोसिस्टम होना चाहिए। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि भारत को तीन राष्ट्रीय एयरलाइंस रखने का हक है।" उन्होंने इंडिगो (IndiGo) और एयर इंडिया (Air India) को देश की प्रमुख एयरलाइंस के रूप में गिना जा सकता है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि हमें उनके समान आकार की एक तीसरी बड़ी एयरलाइन की भी जरूरत है।
बंसल का मानना है कि भारत को 'ओपन-स्काईज' (Open-skies) दृष्टिकोण अपनाने से पहले अपनी एयरलाइंस को वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने (economies of scale) और बेहतर सेवा मानकों को हासिल करने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि पहले भारतीय एयरलाइंस को सुरक्षित और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि वे अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों का सामना कर सकें।
यात्रियों की संख्या में 4 गुना बढ़ोतरी की उम्मीद
विमानन क्षेत्र के भविष्य पर चर्चा करते हुए, बंसल ने बताया कि भारत में यात्री यातायात में जबरदस्त उछाल आने वाला है। अनुमान है कि यात्रियों की संख्या वर्तमान के लगभग 300 मिलियन से बढ़कर 2040-45 तक 1.1-1.2 बिलियन हो जाएगी। इस भारी वृद्धि को संभालने के लिए तीन प्रमुख स्तंभों की आवश्यकता होगी:
- अधिक विमान: एयरलाइंस को अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए और अधिक विमानों के बेड़े की जरूरत होगी।
- विस्तारित हवाई अड्डा बुनियादी ढांचा: यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए एयरपोर्ट्स का विस्तार अनिवार्य है।
- नियामक बदलाव: सरकार और नियामकों को उद्योग की जरूरतों के अनुसार नियमों में बदलाव करने होंगे।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान में भारतीय यात्रियों को यूरोप और अमेरिका जाने के लिए मध्य पूर्व (Middle East) जैसे अंतरराष्ट्रीय हब पर निर्भर रहना पड़ता है। बेहतर सीधी कनेक्टिविटी के लिए एयरलाइंस को अपने बेड़े का विस्तार करना होगा और एयरपोर्ट्स को अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।
अडानी एयरपोर्ट्स का मेगा निवेश प्लान
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए, बंसल ने घोषणा की कि अडानी एयरपोर्ट्स अगले सात वर्षों में हवाई अड्डा बुनियादी ढांचे, गैर-विमानन व्यवसायों और सिटी-साइड विकास में 10-11 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहा है।
कंपनी के भविष्य के लक्ष्यों और विस्तार योजनाओं पर उन्होंने बताया:
- अडानी एयरपोर्ट्स वर्तमान में लगभग 100 मिलियन यात्रियों को संभालता है और अगले 10 वर्षों में इसे 300 मिलियन तक ले जाने का लक्ष्य है।
- कंपनी सरकार के अगले हवाई अड्डा निजीकरण दौर में भाग लेगी, जिसमें 11 हवाई अड्डे शामिल हैं।
- नवी मुंबई हवाई अड्डे के दूसरे चरण (Phase 2) का काम तेजी से चल रहा है, जिसकी क्षमता 2030 तक 50 मिलियन यात्री होने की उम्मीद है।
- मुंबई हवाई अड्डे पर टर्मिनल 1 के पुनर्विकास से दोनों टर्मिनलों की कुल क्षमता 55 मिलियन से बढ़कर लगभग 65 मिलियन यात्री हो जाएगी।
बंसल ने अंत में स्पष्ट किया कि अडानी एयरपोर्ट्स का मुख्य फोकस भारत में विकास के अवसरों को भुनाना है, और अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर तभी विचार किया जाएगा जब कोई विशेष रूप से आकर्षक अवसर सामने आए।