भारत में गरीबी के खिलाफ महाजीत: 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर

विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 49.6 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। गरीबी का स्तर 27.1% से घटकर मात्र 2.6% रह गया है।

Ghazala Saheb30 October 20262 min read0 viewsBihar
भारत में गरीबी के खिलाफ महाजीत: 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर

विश्व बैंक की एक ताजा और उत्साहजनक रिपोर्ट ने भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने दुनिया में गरीबी को कम करने की दिशा में सबसे तेज गति से प्रगति की है। 2011 से 2023 के बीच, भारत ने अनुमानित 49.6 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी के जाल से बाहर निकाला है।

गरीबी के आंकड़ों में आया ऐतिहासिक बदलाव

विश्व बैंक की 'पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' (अक्टूबर 2026) के मुताबिक, भारत में अत्यधिक गरीबी का स्तर जो पहले 27.1 प्रतिशत था, वह अब नाटकीय रूप से गिरकर मात्र 2.6 प्रतिशत रह गया है।

सिर्फ यही नहीं, 4.20 अमेरिकी डॉलर प्रति दिन की निम्न-मध्यम आय गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी में भी भारी कमी देखी गई है। यह आंकड़ा 57.7 प्रतिशत से घटकर अब केवल 16.1 प्रतिशत रह गया है। विश्व बैंक ने इस प्रगति को "दुनिया में गरीबी में सबसे तेज गिरावट में से एक" करार दिया है।

गरीबी कम होने के पीछे क्या रहे मुख्य कारण?

रिपोर्ट में इस अभूतपूर्व सुधार के पीछे कई ठोस कारणों का उल्लेख किया गया है, जिन्होंने आम जनता के जीवन स्तर को सुधारने में मदद की है:

  • मजबूत खपत: घरेलू उपभोग और मांग में निरंतर वृद्धि।
  • रोजगार में वृद्धि: कार्यबल में विस्तार, विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी में बड़ी बढ़ोतरी।
  • सामाजिक सुरक्षा कवच: खाद्य सब्सिडी और अन्य सामाजिक सहायता योजनाओं का व्यापक विस्तार।

बहुआयामी गरीबी में भी आई बड़ी गिरावट

भारत ने केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता से जुड़े गैर-मौद्रिक मापदंडों में भी बड़ी सफलता हासिल की है। ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल के मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के अनुसार, गरीबी दर 2005-06 के 53.8 प्रतिशत से गिरकर 2019-21 में 16.4 प्रतिशत पर आ गई है।

चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं

हालांकि यह प्रगति सराहनीय है, लेकिन रिपोर्ट ने कुछ गंभीर चुनौतियों की ओर भी इशारा किया है। भारत की लगभग 57 प्रतिशत गरीब आबादी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैले एक निरंतर बेल्ट में केंद्रित है। इन राज्यों में उत्पादक रोजगार के अवसर पैदा करना गरीबी उन्मूलन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

युवा बेरोजगारी का बढ़ता दबाव

रिपोर्ट में एक चिंताजनक पहलू यह भी सामने आया है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही से वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के बीच युवा बेरोजगारी दर 14.6 प्रतिशत से बढ़कर 15.9 प्रतिशत हो गई है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की युवा महिलाओं के बीच यह समस्या अधिक गंभीर होती जा रही है। इसके साथ ही, रोजगार का बड़ा हिस्सा अभी भी कम उत्पादकता वाले कार्यों में ही सिमटा हुआ है।

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