जमीन, हवा और अंतरिक्ष: भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को एक साल पूरा
भारत और अमेरिका के बीच मेजर डिफेंस पार्टनरशिप को एक साल पूरा हो गया है। जानें कैसे जमीन, हवा और अंतरिक्ष में बढ़ रहा है रक्षा सहयोग।

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों में एक नया और मजबूत अध्याय जुड़ गया है। अमेरिकी दूतावास ने भारत-अमेरिका 'मेजर डिफेंस पार्टनरशिप' (Major Defence Partnership) ढांचे को एक साल पूरा होने पर इसकी सफलता और भविष्य की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया है। यह साझेदारी दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को एक नई दिशा देने के लिए तैयार की गई है।
रक्षा सहयोग के नए आयाम और प्राथमिकताएं
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य केवल पारंपरिक सैन्य सहयोग तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना करना है। अमेरिकी दूतावास के अनुसार, इस ढांचे के तहत निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है:
- परिचालन समन्वय (Operational coordination): दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बिठाना।
- सूचना साझा करना (Information sharing): रणनीतिक और महत्वपूर्ण जानकारी का आदान-प्रदान करना।
- रक्षा औद्योगिक सहयोग: रक्षा उत्पादन और तकनीक के क्षेत्र में मिलकर काम करना।
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी: रक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
यह ऐतिहासिक समझौता जमीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबर स्पेस—इन सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक गहरा बनाने का लक्ष्य रखता है।
महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकातें और वैश्विक मंच
हाल ही में फिलीपींस के सेबू में आयोजित 13वें आसियान (ASEAN) रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान, भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ उच्च स्तरीय चर्चा की। यह मुलाकात उस महत्वपूर्ण 10-वर्षीय रोडमैप के बाद हुई है, जिस पर अक्टूबर 2025 में कुआलालंपुर, मलेशिया में हस्ताक्षर किए गए थे।
राजनाथ सिंह ने इस दौरान केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े कई अन्य देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें शामिल हैं:
- जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी
- ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स
- दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री कांग शिन-चुल
- सिंगापुर के रक्षा मंत्री चान चुन सिंग
- फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिलबर्टो सी. टेओडोरो जूनियर
'इंडिया-आसियान यूथ ब्रिज' का प्रस्ताव
क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के उद्देश्य से, रक्षा मंत्री ने 'इंडिया-आसियान यूथ ब्रिज' (India-ASEAN Youth Bridge) स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। इस पहल का लक्ष्य युवाओं के बीच डिजिटल नवाचार, क्षमता निर्माण और आपसी संबंधों को मजबूत करना है।
बैठक के दौरान, भारत ने हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति और समृद्धि बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के कड़े रुख को स्पष्ट करते हुए, रक्षा मंत्री ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उदाहरण भी दिया, जो आतंकवादी बुनियादी ढांचे से निपटने के भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है।