भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पहली किस्त फाइनल, जल्द होगा लागू

Ghazala Saheb15 October 20262 min read0 viewsBihar
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पहली किस्त फाइनल, जल्द होगा लागू

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (BTA) की पहली किस्त को अंतिम रूप दे दिया गया है। वर्तमान में यह समझौता कानूनी ड्राफ्टिंग और अंतिम समीक्षा के दौर से गुजर रहा है।

प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने पर जोर

श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी कॉन्क्लेव के उद्घाटन के दौरान पीयूष गोयल ने इस प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते को जल्द ही लागू कर दिया जाएगा। गोयल के अनुसार, भारत इस समझौते को तब पूरी तरह से प्रभावी बनाना चाहता है जब वह अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर बढ़त हासिल कर ले।

उन्होंने कहा, "अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की पहली किस्त फाइनल हो चुकी है। यह अब अंतिम चरणों और कानूनी ड्राफ्टिंग के दौर में है। हमें उम्मीद है कि हम इसे जल्द ही अंतिम रूप देकर लागू कर सकेंगे।"

व्यापार के आंकड़े: निर्यात में उछाल

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद अमेरिका के साथ भारत का व्यापार काफी मजबूत रहा है।

  • निर्यात में वृद्धि: अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान अमेरिका को भारत का माल निर्यात 11.1 प्रतिशत बढ़कर 50.81 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 45.73 अरब डॉलर था।
  • आयात का हाल: अमेरिका से होने वाला आयात 26 प्रतिशत बढ़कर 32.33 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल 25.66 अरब डॉलर था।
  • व्यापार अधिशेष: इस वृद्धि के कारण अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) घटकर 18.48 अरब डॉलर रह गया है, जो पहले 20.07 अरब डॉलर था।

बाजार में प्राथमिकता पाने की कोशिश

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य अमेरिकी बाजार में प्रिफरेंशियल एक्सेस (वरीयता प्राप्त पहुंच) हासिल करना है, ताकि भारतीय निर्यातक अन्य देशों के मुकाबले प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि व्यापार समझौते का उद्देश्य न केवल एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच बनाना है, बल्कि विशिष्ट बाजारों में प्राथमिकता प्राप्त करना भी है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष की पहली छमाही के दौरान अमेरिका भारत के लिए माल निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है।

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