भारत में जल प्रबंधन: पीएम मोदी के सुधारों की दुनिया में हो रही चर्चा

IIM बैंगलोर में हाल ही में लॉन्च की गई एक नई स्टडी ने भारत में जल प्रबंधन के सफर को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। इस अध्ययन में बताया गया है कि कैसे 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए सुधारों ने आज एक वैश्विक मॉडल का रूप ले लिया है। 'From Gujarat to India: Water Lessons for the World' शीर्षक वाली यह स्टडी जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी और गेट्स फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित की गई है।
गुजरात से शुरू हुआ जल क्रांति का सफर
अध्ययन के लेखकों में जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर डैनियल डब्ल्यू स्मिथ, CEEW के नितिन बस्सी और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पूर्व सचिव परमेश्वरन अय्यर शामिल हैं। डैनियल स्मिथ ने बताया कि गुजरात के अनुभव से दुनिया बहुत कुछ सीख सकती है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी सीख यह है कि जल प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
स्टडी के अनुसार, गुजरात में जल की कमी को देखते हुए कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए थे, जैसे:
- नर्मदा आधारित जल ग्रिड का निर्माण।
- WASMO जैसे संस्थानों की स्थापना।
- GGRC और सूक्ष्म सिंचाई (micro-irrigation) पर जोर।
- सामुदायिक प्रबंधन और तकनीक का प्रभावी उपयोग।
स्मिथ ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने जिस पैमाने पर काम किया है, वह अकल्पनीय है। उन्होंने कहा, "भारत में ग्रामीण क्षेत्रों के 40 करोड़ से अधिक लोगों को इस अवधि के दौरान सुरक्षित पेयजल प्राप्त हुआ है।"
राष्ट्रीय स्तर पर बड़े बदलाव और मिशन
परमेश्वरन अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने गुजरात में जल प्रबंधन के बीज बोए थे, जो आज राष्ट्रीय स्तर पर बड़े मिशनों के रूप में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद, गुजरात के कई सफल कार्यक्रमों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया।
इन प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल हैं:
- जल जीवन मिशन: हर घर तक नल से जल पहुँचाने का लक्ष्य।
- नमामि गंगे: गंगा नदी के संरक्षण के लिए।
- जल शक्ति अभियान: जल संरक्षण और संचयन के लिए।
वैश्विक स्तर पर भारत का मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही हर देश की जल विज्ञान (hydrology) और आवश्यकताएं अलग हों, लेकिन भारत द्वारा अपनाया गया बुनियादी ढांचा—जिसमें सार्वजनिक वित्तपोषण और प्रशासनिक संरचना का निर्माण शामिल है—दुनिया के अन्य देशों, विशेषकर 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
परमेश्वरन अय्यर ने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब जल जीवन मिशन पर चर्चा हो रही थी, तब प्रधानमंत्री बहुत स्पष्ट थे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 'जल शक्ति मंत्रालय' का नाम स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने ही दिया था। यह अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि कैसे एक राज्य के स्थानीय सुधारों ने पूरे देश की जल नीति को बदल दिया है।