चीन-पाक सीमा पर बढ़ेगी ताकत, सेना को मिलेंगे 335 K-9 वज्र होवित्जर
रक्षा मंत्रालय ने 335 K-9 वज्र होवित्जर खरीदने के लिए 20,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिससे चीन और पाक सीमा पर ताकत बढ़ेगी।

भारतीय सेना की मारक क्षमता में एक बहुत बड़ा इजाफा होने जा रहा है। चीन और पाकिस्तान के साथ लगी सीमाओं पर तैनात सेना को अब और अधिक शक्तिशाली तोपखाने का साथ मिलेगा। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को 335 नए K-9 वज्र होवित्जर खरीदने के लिए 20,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
20,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट
यह रक्षा क्षेत्र में दशकों की सबसे बड़ी खरीद मानी जा रही है। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि यह 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत किया जा रहा है। इन होवित्जर में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इनका निर्माण दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा किया जाएगा। वर्तमान में भारतीय सेना के पास पहले से ही 200 K-9 वज्र होवित्जर तैनात हैं।
लद्दाख की बर्फीली चोटियों के लिए विशेष तैयारी
इन तोपों को विशेष रूप से लद्दाख जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले और भीषण ठंड वाले क्षेत्रों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन 335 होवित्जर के साथ बड़ी संख्या में विंटर किट भी प्रदान की जाएगी। इससे सेना को लद्दाख की कठिन परिस्थितियों में भी बिना किसी बाधा के ऑपरेशन करने में मदद मिलेगी।
गलवान के बाद बढ़ी जरूरत
दक्षिण कोरियाई साझेदारी के साथ निर्मित ये तोपें पहले ही लद्दाख सेक्टर में सफलतापूर्वक आजमाई जा चुकी हैं। गलवान घाटी की घटनाओं के बाद इनका परीक्षण किया गया था और ये अत्यधिक ठंड में भी बेहतरीन प्रदर्शन करती पाई गई हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में गुजरात के हजीरा स्थित L&T प्लांट का दौरा भी किया था, जहां इन वज्र तोपों और जोरावर लाइट टैंकों का निर्माण होता है।