युद्ध के मैदान में बढ़ेगी भारतीय सेना की ताकत, मेक टेक 2.0 से मिलेगी नई तकनीक
भारतीय सेना मेक टेक 2.0 के जरिए युद्ध के मैदान की चुनौतियों से निपटने के लिए नई और स्वदेशी तकनीक विकसित करने की तैयारी कर रही है।

भारतीय सेना अब युद्ध के बदलते स्वरूप और आधुनिक तकनीक के दौर में खुद को और अधिक शक्तिशाली बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित 'मेक टेक 2.0' (Mech Tech 2.0) सेमिनार के कर्टन रेजर कार्यक्रम में सेना ने अपनी भविष्य की रणनीति का खुलासा किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युद्ध के मैदान में सैनिकों की वास्तविक जरूरतों को समझते हुए उन्हें अत्याधुनिक और स्वदेशी तकनीकी समाधान उपलब्ध कराना है।
तकनीक से लैस होगा भविष्य का युद्धक्षेत्र
आज के दौर में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत ड्रोन और सटीक हथियार (precision weapons) जैसे नए तकनीकी आयाम युद्ध के मैदान को पूरी तरह बदल रहे हैं। इस विषय पर चर्चा करते हुए पश्चिमी कमांड के जीओसी-इन-चार्ज, लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह ने कहा, "आगे रहने के लिए हमें न केवल नई क्षमताएं विकसित करनी होंगी, बल्कि अपने मौजूदा सैन्य प्लेटफार्मों को अधिक प्रभावी, घातक और सुरक्षित बनाने के स्मार्ट तरीके भी खोजने होंगे।"
मेक टेक 2.0 का मुख्य विषय 'भविष्य के युद्ध के लिए मौजूदा प्लेटफार्मों का रूपांतरण' रखा गया है। इस पहल का लक्ष्य नवाचार, सहयोग और स्वदेशी क्षमता के विकास के माध्यम से मैकेनाइज्ड फोर्सेज के तकनीकी परिवर्तन को तेज करना है।
सैनिकों की जरूरतों को दी जा रही प्राथमिकता
इस पूरी योजना की सबसे खास बात इसका 'बॉटम-अप अप्रोच' है। सेना केवल बाजार में उपलब्ध तकनीक पर निर्भर नहीं है, बल्कि सबसे पहले यह सवाल पूछ रही है कि हमारे सैनिक जमीन पर किन वास्तविक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
इन जमीनी चुनौतियों के आधार पर विशिष्ट समस्याओं की पहचान की जा रही है और 'प्रॉब्लम डेफिनेशन स्टेटमेंट' तैयार किए जा रहे हैं। इन समस्याओं को उद्योग जगत के दिग्गजों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझा किया जाएगा ताकि व्यावहारिक, किफायती और अभिनव समाधान खोजे जा सकें।
आत्मनिर्भर भारत और भविष्य की तैयारी
मेक टेक 2.0 का उद्देश्य केवल युद्ध क्षमता बढ़ाना ही नहीं है, बल्कि एक मजबूत रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना और 'आत्मनिर्भर भारत' को नई गति देना भी है।
यह कार्यक्रम दिसंबर 2026 में चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन में आयोजित होने वाले मुख्य सेमिनार की नींव रख रहा है। 14-15 दिसंबर 2026 को होने वाले इस मुख्य सेमिनार में सशस्त्र बल, उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञ एक साथ आएंगे। यहाँ विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए नई तकनीकों का प्रदर्शन और समाधान तलाशा जाएगा।