ISRO की बड़ी कामयाबी: NVS-03 सैटेलाइट लॉन्च, बिहार CM ने दी बधाई
इसरो ने सफलतापूर्वक NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च किया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों को बधाई दी है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 का सफल प्रक्षेपण किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस अब्दुल नज़ीर और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित देश के कई बड़े नेताओं ने वैज्ञानिकों को बधाई दी है।
बिहार के मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों को सराहा
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों और पूरी टीम को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने इस मिशन को भारत की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी कौशल और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लगातार नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है। NVS-03 का सफल प्रक्षेपण भारत की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी कौशल और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।" - सम्राट चौधरी
सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत की यह प्रगति वैश्विक स्तर पर देश की पहचान बना रही है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए असीमित संभावनाओं के द्वार खोल रही है।
NavIC प्रणाली को मिलेगी नई मजबूती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को इस महत्वपूर्ण मिशन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत के स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन सिस्टम, NavIC को और अधिक शक्तिशाली बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पीएम मोदी के अनुसार, NVS-03 की उन्नत क्षमताओं से नेविगेशन सेवाओं में सुधार होगा और यह महत्वपूर्ण तकनीकों में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। उन्होंने वैज्ञानिकों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और सूझबूझ देश को गौरवान्वित कर रही है।
NVS-03 सैटेलाइट की मुख्य विशेषताएं
इस मिशन की तकनीकी बारीकियों और क्षमताओं पर एक नज़र डालते हैं:
- अगली पीढ़ी का उपग्रह: NVS-03, इसरो की अगली पीढ़ी की नेविगेशन सैटेलाइट श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है, जिसे IRNSS सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
- सफल कक्षा: रॉकेट से अलग होने के बाद उपग्रह को सफलतापूर्वक इसके निर्धारित जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया गया है।
- उन्नत सिग्नल क्षमता: यह उपग्रह मौजूदा L5 और S-बैंड सिग्नलों के साथ-साथ नया L1 नेविगेशन सिग्नल भी प्रदान करेगा, जिससे NavIC की कार्यक्षमता बढ़ेगी।
- स्वदेशी तकनीक: इस सैटेलाइट में स्वदेशी परमाणु घड़ी (atomic clock) का उपयोग किया गया है।
- विस्तृत कवरेज: यह प्रणाली भारत के भूभाग के साथ-साथ इसकी भौगोलिक सीमा से 1,500 किलोमीटर दूर तक कवरेज प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है।