'मन की बात छोड़ें, जनता की समस्या सुलझाएं': महंगाई पर जयराम रमेश का प्रहार
दिवाली से पहले प्याज और चीनी के बढ़ते दामों पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार को घेरा और पीएम मोदी से जनता की समस्या सुनने की मांग की।

दिवाली के त्योहार से ठीक पहले देश में बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार कीमतों में हो रहे इस बेतहाशा उछाल को रोकने में पूरी तरह विफल रही है। रमेश ने कहा कि त्योहारों के इस मौसम में परिवारों के लिए उत्सव मनाना और बुनियादी घरेलू जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
रसोई का बजट हुआ बेपटरी
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महंगाई केवल बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में, एक आम परिवार त्योहार मनाए या घर का बजट संभाले? 'अच्छे दिनों' के वादों की कड़वी सच्चाई हर दिन बढ़ती महंगाई के रूप में सामने आ रही है।"
रमेश ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में हुए भारी बदलावों का विवरण देते हुए बताया कि पिछले चार महीनों में:
- प्याज की कीमत: 85% बढ़ गई है।
- चीनी की कीमत: 34% बढ़ गई है।
- टमाटर: पिछले एक महीने में 8.5% महंगे हुए हैं।
- दालें: अरहर दाल में 3.5% और चना दाल में 3.1% की वृद्धि हुई है।
- बादाम: दिवाली से पहले इनकी कीमत ₹1,300 प्रति किलो तक पहुंच गई है।
- छोटी इलायची: इसमें ₹300 तक का उछाल देखा गया है।
'मन की बात' बनाम जनता की पीड़ा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री केवल जीडीपी (GDP) के आंकड़ों का गुणगान करते हैं, लेकिन आम जनता की इस पीड़ा पर पूरी तरह मौन हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में लोगों की वास्तविक आय (महंगाई को समायोजित करने के बाद) या तो स्थिर रही है या उसमें गिरावट आई है।
रमेश ने प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर संबोधित करते हुए लिखा, "प्रधानमंत्री जी, अपनी 'मन की बात' को एक तरफ रखें और लोगों की वास्तविक चिंताओं और समस्याओं को संबोधित करें।"
बाजार की स्थिति और विशेषज्ञों की चेतावनी
एक तरफ जहां राजनीतिक घमासान जारी है, वहीं आर्थिक रिपोर्टों ने भी महंगाई को लेकर चिंता जताई है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि दूसरी तिमाही में उपभोक्ता मांग मजबूत रही है, लेकिन बढ़ती इनपुट लागतों के कारण आने वाले समय में कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
इसी तरह, आईसीआरए (ICRA) की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने भी संकेत दिया है कि खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आने वाले समय में उपभोक्ता खर्च में मध्यम वृद्धि या गिरावट देखी जा सकती है।