सरदार पटेल और इंदिरा गांधी: जयराम रमेश ने याद किए दो 'अदम्य' व्यक्तित्व
जयराम रमेश ने सरदार पटेल की 151वीं जयंती और इंदिरा गांधी की 42वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए उनके ऐतिहासिक योगदानों को बताया।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शनिवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 42वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक ऐतिहासिक तस्वीर साझा करते हुए इन दोनों महान नेताओं के योगदान को याद किया, जिन्होंने भारत के इतिहास और भूगोल को नया आकार दिया।
देश की एकता और विकास के मजबूत स्तंभ
जयराम रमेश ने सरदार पटेल को भारत की स्वतंत्रता के प्रमुख वास्तुकार के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि पटेल ने न केवल देश की एकता को एक जीवंत वास्तविकता बनाया, बल्कि उनके कार्यों ने दशकों बाद आने वाली 'श्वेत क्रांति' (White Revolution) के लिए भी प्रेरणा का आधार तैयार किया।
वहीं, इंदिरा गांधी को एक अत्यंत साहसी और प्रभावशाली व्यक्तित्व बताते हुए रमेश ने कहा कि उनके नेतृत्व में भारत एक परमाणु और अंतरिक्ष शक्ति के रूप में मजबूती से उभरा। उन्होंने देश में 'हरित क्रांति' (Green Revolution) को गति देने में भी निर्णायक भूमिका निभाई।
एक ऐतिहासिक तस्वीर और गहरा सम्मान
रमेश ने एक पुरानी तस्वीर भी साझा की, जो नवंबर 1947 में नई दिल्ली में ली गई थी। यह तस्वीर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान की है। इस तस्वीर में 30 वर्षीय इंदिरा गांधी, 72 वर्षीय तत्कालीन उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल का अभिवादन करती नजर आ रही हैं।
"दो भारतीय, दोनों अदम्य और दृढ़निश्चयी। दोनों ने उपमहाद्वीप के भूगोल और इतिहास को आकार दिया।" - जयराम रमेश
जयराम रमेश ने इस बात पर भी जोर दिया कि इतिहास को बदलने वाले लोग यह नहीं मिटा सकते कि इंदिरा गांधी के मन में सरदार पटेल के प्रति कितना गहरा सम्मान और प्रशंसा थी। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए बताया कि सरदार पटेल की वह एकमात्र प्रतिमा थी, जिसका अनावरण स्वयं नेहरू ने 13 फरवरी 1949 को गोधरा में किया था।
प्रमुख योगदानों का सारांश
- सरदार वल्लभभाई पटेल: आजादी के बाद 560 से अधिक रियासतों के राजनीतिक एकीकरण का कठिन कार्य पूरा किया।
- इंदिरा गांधी: भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री, जिन्होंने देश को परमाणु और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया।