30 साल का संघर्ष सुक्खू सरकार ले रही क्रेडिट? जयराम ठाकुर का बड़ा हमला
हिमाचल के पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने BBMB बिजली हक के लिए सुक्खू सरकार पर दूसरों के काम का श्रेय लेने का आरोप लगाया।

हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के बिजली अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश कर रही है। ठाकुर ने स्पष्ट किया कि जयराम ठाकुर BBMB बिजली अधिकार की यह लड़ाई कोई नई नहीं है, बल्कि यह पिछले तीन दशकों के कड़े संघर्ष का परिणाम है।
30 साल की मेहनत का श्रेय कौन लेगा?
शिमला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ठाकुर ने कहा कि यह उपलब्धि पिछली कई सरकारों के निरंतर प्रयासों और कानूनी लड़ाइयों का नतीजा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुक्खू पर निशाना साधते हुए पूछा कि इस ऐतिहासिक फैसले में उनका व्यक्तिगत योगदान क्या रहा है? ठाकुर के अनुसार, इस अधिकार को हासिल करने के लिए राज्य की विभिन्न सरकारों ने लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर काम किया है।
विवाद का लंबा और ऐतिहासिक सफर
जयराम ठाकुर ने इस मामले के इतिहास को याद दिलाते हुए बताया कि यह लड़ाई दशकों पुरानी है:
- शांता कुमार का प्रयास: पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने सबसे पहले हिमाचल के जल संसाधनों पर रॉयल्टी की मांग को प्रमुखता से उठाया था।
- वीरभद्र सिंह का दौर: 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल के दौरान यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
- प्रेम कुमार धूमल सरकार: 27 सितंबर 2011 को धूमल सरकार के समय हिमाचल का 7.19 प्रतिशत बिजली का हिस्सा सुरक्षित किया गया था।
- भाजपा सरकार का योगदान: ठाकुर ने कहा कि उनकी भाजपा सरकार ने 4 जनवरी 2018 को कैबिनेट बैठक में ऊर्जा अंतर की बहाली पर चर्चा करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया था।
ठाकुर ने जानकारी दी कि कानूनी प्रक्रियाओं और केंद्र सरकार व अटॉर्नी जनरल के हस्तक्षेप के बाद अब हिमाचल प्रदेश को अगले 20 वर्षों में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त होगी। इसमें सर्दियों के छह महीनों के दौरान सालाना लगभग 598 मिलियन यूनिट बिजली शामिल होगी।
मुफ्त बिजली के वादे पर घेरा
बिजली के मुद्दे पर सुक्खू सरकार को घेरते हुए ठाकुर ने 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को फिर से बहाल करने की मांग की। उन्होंने कांग्रेस के चुनावी वादों की भी याद दिलाई और पूछा, "कांग्रेस ने चुनाव से पहले 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की गारंटी दी थी, लेकिन वह वादा अब कहां है?"
उन्होंने बढ़ते बिजली शुल्क, अतिरिक्त उपकर (cess) और उद्योगों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
वित्तीय प्रबंधन और कर्मचारियों की समस्या
राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार एक तरफ कर्ज ले रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों को उनके महंगाई भत्ते (DA), एरियर और मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि केवल दूसरों की मेहनत का श्रेय लेने और अधूरे वादे करने से कांग्रेस सरकार जनता का विश्वास नहीं जीत पाएगी। ठाकुर ने दावा किया कि अगले चुनावों में कांग्रेस को करारी शिकस्त मिलेगी और यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो वर्तमान सरकार के निर्णयों की समीक्षा की जाएगी।