जयशंकर और मार्को रुबियो की मुंबई में महाबैठक, रक्षा और ऊर्जा पर चर्चा

मुंबई में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, अपनी पत्नी जेनेट रुबियो और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ मुंबई पहुंचे। वहां उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद थे। इस दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
व्यापार, तकनीक और रक्षा पर विशेष ध्यान
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस चर्चा में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:
- व्यापार और निवेश: दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना।
- ऊर्जा सुरक्षा: भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और सुरक्षा के लिए सहयोग।
- रक्षा और तकनीक: रक्षा क्षेत्र में साझेदारी और नई तकनीकों का आदान-प्रदान।
- जन-जन का जुड़ाव: लोगों के बीच आपसी संबंधों और सांस्कृतिक संपर्क को बढ़ावा देना।
भारत, अमेरिका और यूएई का त्रिपक्षीय संवाद
इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान एक और बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। जयशंकर, मार्को रुबियो और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने भी मुंबई में मुलाकात की। इस त्रिपक्षीय चर्चा का मुख्य केंद्र क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना था।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मुलाकात के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गुजरात के जामनगर का अगला पड़ाव
मार्को रुबियो की इस भारत यात्रा का उद्देश्य केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में ठोस परिणाम प्राप्त करना भी है। मुंबई में अपने आधिकारिक कार्यक्रम को पूरा करने के बाद, रुबियो गुजरात के जामनगर के लिए रवाना होंगे। वहां उनका मुख्य एजेंडा 'उन्नत ऊर्जा सहयोग' पर चर्चा करना होगा।
गौरतलब है कि रुबियो को मुंबई हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न स्तंभों को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर मानी जा रही है।