"मूकदर्शक न बनें, नेतृत्व करें": संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर जयशंकर की चेतावनी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग करते हुए कहा कि संस्था को वैश्विक संकटों में मूकदर्शक नहीं बनना चाहिए।

Ghazala Saheb25 October 20262 min read0 viewsBihar
"मूकदर्शक न बनें, नेतृत्व करें": संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर जयशंकर की चेतावनी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की पुरजोर मांग करते हुए कहा कि वैश्विक संस्था को संकटों के समय मूकदर्शक नहीं बनना चाहिए। भारत मंडपम में 'चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन' के दौरान बोलते हुए, उन्होंने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को केवल तमाशबीन बनकर नहीं रहना चाहिए, क्योंकि यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्धों का आर्थिक खामियाजा दुनिया भर की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

युद्धों का आर्थिक बोझ झेल रही दुनिया

जयशंकर ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि यूक्रेन और मध्य पूर्व (West Asia) में जारी संघर्षों का असर उन देशों और लोगों पर भी पड़ रहा है, जिनका इन युद्धों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा:

"आज दुनिया में दो बड़े संघर्ष चल रहे हैं: यूक्रेन और पश्चिम एशिया में। दूर बैठे समाज, अर्थव्यवस्थाएं और लोग, जिनकी इन मामलों में कोई भूमिका नहीं है, वास्तव में इसकी कीमत चुका रहे हैं। हम मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि ईंधन और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता इन युद्धों का ही प्रत्यक्ष परिणाम है।

सुरक्षा परिषद में बदलाव की जरूरत

संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर, जयशंकर ने संस्थागत सुधारों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) जैसे निर्णय लेने वाले निकायों में बदलाव की मांग दोहराई। उन्होंने 'सुधारित बहुपक्षवाद' (Reformed Multilateralism) पर जोर देते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:

  • दुनिया के बड़े हिस्से, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) को वैश्विक शासन के ढांचे से बाहर नहीं रखा जा सकता।
  • संयुक्त राष्ट्र को अपनी वर्तमान कमियों और सीमाओं को पहचानना होगा और उनमें सुधार करना होगा।
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक समावेशिता की आवश्यकता है।

संवाद और कूटनीति ही समाधान

भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि युद्ध के मैदान से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संघर्षों को समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक शांति के लिए प्रयास कर रहा है और अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने अंत में कहा कि संयुक्त राष्ट्र का गठन सहयोग की भावना के साथ किया गया था, और आज भी चुनौतियों का सामना करने के लिए दुनिया को एकजुट होकर काम करना चाहिए।

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