भारत-जापान संबंध: विविधता देख मंत्रमुग्ध हुए जापानी राजदूत

जापानी राजदूत ओनो केइची ने भारत में दो साल पूरे होने पर भारत-जापान संबंध और देश की विविधता की सराहना की।

Ghazala Saheb23 October 20262 min read0 viewsBihar
भारत-जापान संबंध: विविधता देख मंत्रमुग्ध हुए जापानी राजदूत

भारत में अपने दो साल पूरे होने के अवसर पर जापानी राजदूत ओनो केइची ने भारत-जापान संबंध की मजबूती और देश की गतिशीलता व विविधता की जमकर प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ उनके अनुभव और दोनों देशों के बीच संबंधों की क्षमता को लेकर उनका सम्मान लगातार बढ़ता जा रहा है।

18 राज्यों का सफर और गहराता सांस्कृतिक जुड़ाव

ओनो केइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यात्रा की यादें साझा करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने भारत के 18 राज्यों की 36 यात्राएं की हैं। इस दौरान उन्होंने न केवल कूटनीतिक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर जैसे दिग्गजों से मुलाकात की, बल्कि भारत की सांस्कृतिक गहराई को भी करीब से महसूस किया। उन्होंने ऋषिकेश में गंगा नदी में डुबकी लगाने जैसे आध्यात्मिक अनुभवों को भी साझा किया।

राजदूत ने अपनी यात्रा के दौरान विभिन्न भारतीय व्यंजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, "2027 में हमारे संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने पर मैं हमारी मित्रता को और मजबूत करने के लिए तत्पर हूं!"

रणनीतिक साझेदारी और भविष्य की राह

भारत और जापान के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भी हैं। 2014 से दोनों देश 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' साझा कर रहे हैं। इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, हाल ही में जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने भारत का दौरा किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ व्यापार, ऊर्जा संक्रमण, उन्नत तकनीक और रक्षा सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान, दोनों देशों ने आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा समाधान और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर भी हस्ताक्षर किए। इसके अलावा, जापान में भारत की राजदूत नगमा मल्लिक और जापानी विदेश मंत्री के प्रतिनिधियों के बीच भी द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने पर सहमति बनी है। यह निरंतर प्रयास दोनों राष्ट्रों के बीच भविष्य के आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

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