जदयू का फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद कार्यक्रम पांच सितंबर से होगा शुरू

पिछले 30 वर्षों से फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि की भारी कीमत चुका रहा बिहार: उमेश सिंह कुशवाहा पटना, 31 अगस्त (हि.स.)। फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि के मुद्दे पर जनता दल यूनाईटेड (जदयू) की ओर से 5 सितंबर से ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के प्रथम चरण की शुरुआत की जाएगी। इसके तहत पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा संयुक्त रूप से संवाद करेंगे।
इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने साेमवार काे बताया कि गंगा किनारे बसे बिहार के सभी 12 जिलों में चरणबद्ध तरीके से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रथम चरण में चार जिलों में कार्यक्रम होंगे, जिसकी शुरुआत बक्सर से होगी।
उन्होंने कहा कि संवाद के माध्यम से फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि के बिहार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों एवं आम लोगों की समस्याओं और चिंताओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।
उन्हाेंने कहा कि बिहार पिछले 30 वर्षों से फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि की भारी कीमत चुका रहा है। नीतीश कुमार लंबे समय से फरक्का के कारण बिहार को हो रहे नुकसान और बिहार के जल हितों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं।
उन्होंने हर मंच पर बिहार के हितों को मजबूती से रखने और फरक्का बैराज के दुष्प्रभावों से बिहार को निजात दिलाने की मांग की है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में भारी मात्रा में गाद जमा होने से नदी की गहराई और जलधारण क्षमता प्रभावित हुई है। इसके चलते बिहार को हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी झेलनी पड़ती है, जिससे किसानों की फसलें तबाह होती हैं और खेती-किसानी पर प्रतिकूल असर पड़ता है। फरक्का का मुद्दा बिहार के जल, कृषि और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार को गंगा और उसकी सहायक नदियों के जल का फरक्का बैराज के लिए उपलब्ध कराना पड़ता है। वहीं, बिहार तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में नए उद्योग और कल-कारखाने स्थापित हो रहे हैं, ऐसे में पानी की आवश्यकता भी लगातार बढ़ रही है। इसलिए फरक्का जल संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर हो भी, तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीति सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिसमें बिहार के हितों से कोई समझौता न हो।