भारत की वैज्ञानिक प्रगति: अब हम ग्लोबल को-क्रिएटर हैं - जितेंद्र सिंह
ESTIC 2026 में जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब विज्ञान और तकनीक में केवल अनुयायी नहीं, बल्कि वैश्विक सह-निर्माता बन चुका है। जानें भारत की बड़ी उपलब्धियां।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति अब उस स्तर पर पहुंच गई है जहां देश केवल अन्य देशों का अनुसरण नहीं कर रहा, बल्कि नई तकनीकों और समाधानों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ESTIC 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब वैश्विक नवाचार के क्षेत्र में एक 'ग्लोबल को-क्रिएटर' बन चुका है।
'मोदी के भारत' ने बदली दुनिया में पहचान
तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब 20वीं सदी का पुराना भारत नहीं है। उन्होंने कहा, "आज का भारत भविष्य के लिए तैयार है—यह 21वीं सदी का 'मोदी का भारत' है। भारत अब केवल एक सहयोगी नहीं है, बल्कि वह दुनिया को रास्ता दिखाने वाला देश बन गया है।"
इस सम्मेलन का मुख्य विषय 'क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पॉवरिंग टेक्नोलॉजीज' रखा गया है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर तीन नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित दुनिया भर के हजारों विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने शिरकत की, जो वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है।
विक्रम साराभाई का संघर्ष और बदलता परिवेश
भारत के वैज्ञानिक सफर को याद करते हुए मंत्री ने एक भावुक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा की कभी कमी नहीं रही, लेकिन संसाधनों और सही माहौल की कमी थी। उन्होंने विक्रम साराभाई का जिक्र करते हुए कहा कि वे अपने वैज्ञानिक उपकरण साइकिल पर ढोकर ले जाते थे।
"हमारे वैज्ञानिकों में हमेशा से जुनून और कड़ी मेहनत करने का जज्बा रहा है। कमी केवल एक सहायक इकोसिस्टम की थी, जिसे 2014 के बाद की नीतिगत पहलों के माध्यम से सफलतापूर्वक भरा गया है।"
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने अनुसंधान के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार किया है और अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया है।
आंकड़ों में भारत की ऐतिहासिक सफलता
सम्मेलन में भारत की आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियों के प्रभावशाली आंकड़े पेश किए गए, जो देश की बदलती तस्वीर को दर्शाते हैं:
- स्टार्टअप क्रांति: भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम 350 से बढ़कर 2.5 लाख तक पहुंच गया है, जिससे भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
- स्पेस इकोनॉमी: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो कभी नगण्य थी, अब 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर का विशाल क्षेत्र बन चुकी है।
- बायो-इकोनॉमी: यह क्षेत्र 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर लगभग 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।
- अनुसंधान कोष: नवाचार को नई ऊंचाई देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के 'रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड' की घोषणा की गई है।
मंत्री ने 'अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' की स्थापना और ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की बेहतर होती रैंकिंग को भी देश की वैज्ञानिक शक्ति का आधार बताया।