शिमला में कांगड़ा पेंटिंग्स की नई गैलरी: राज्यपाल ने किया उद्घाटन

Ghazala Saheb15 October 20262 min read0 viewsBihar
शिमला में कांगड़ा पेंटिंग्स की नई गैलरी: राज्यपाल ने किया उद्घाटन

शिमला के भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान (IIAS) में कला और संस्कृति का एक नया अध्याय जुड़ गया है। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने संस्थान में 'कांगड़ा कलम: द पहाड़ी मिनिएचर आर्ट गैलरी' का भव्य उद्घाटन किया। यह पहल राज्य की पारंपरिक कलात्मक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

पहाड़ी संस्कृति और ग्रामीण जीवन की अनूठी झलक

यह स्थायी गैलरी संस्थान के मुख्य भवन के कमरा नंबर 8 में स्थित है। इस गैलरी की सबसे खास बात यह है कि यह केवल शाही दरबारों या धार्मिक कथाओं तक सीमित नहीं है। इसके बजाय, यह कांगड़ा मिनिएचर पेंटिंग्स के माध्यम से पहाड़ी समुदायों के वास्तविक और रोजमर्रा के जीवन को दर्शाती है।

गैलरी में निम्नलिखित विषयों को प्रमुखता से दिखाया गया है:

  • ग्रामीण जीवन: खेती-बाड़ी और पारंपरिक कामकाज।
  • लोक परंपराएं: लोक संगीत और स्थानीय रीति-रिवाज।
  • सामुदायिक जीवन: गद्दी समुदाय की जीवनशैली और उनके पारंपरिक पहनावे।
  • सांस्कृतिक दृश्य: भोजन बनाने की प्रक्रिया और स्थानीय देवताओं के भव्य जुलूस।

यह पहल कला, प्रकृति और हिमालयी क्षेत्र के दैनिक जीवन के बीच के गहरे संबंध को उजागर करती है।

साहित्य और महापुरुषों को सम्मान

इस विशेष अवसर पर राज्यपाल ने संस्थान के संस्थापक सर्वपल्ली राधाकृष्णन की एक प्रतिमा का भी अनावरण किया। इसके साथ ही, एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसका शीर्षक है 'फोल्क एंड रूरल इमेजरी इन कांगड़ा मिनिएचर्स: एन इंडिजिनस इंडियन आर्ट पर्सपेक्टिव'।

प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी और डॉ. पंकज गुप्ता द्वारा लिखित यह पुस्तक कांगड़ा मिनिएचर पेंटिंग्स के माध्यम से पहाड़ी लोक जीवन और ग्रामीण परिवेश का गहराई से दस्तावेजीकरण करती है। यह शोध और कला प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित होगी।

हीरक जयंती समारोह का शानदार समापन

IIAS के हीरक जयंती समारोह के समापन के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की भी धूम रही। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश और राजस्थान की समृद्ध परंपराओं को दर्शाने वाले संगीत, नृत्य और कविता पाठ शामिल थे।

समारोह के दौरान कुछ अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियां भी देखी गईं:

  • कला प्रदर्शनी: निशा जयसवाल द्वारा 'भारतीय फॉर्म्स, एक्सप्रेशंस एंड कॉन्शियसनेस' नामक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
  • पुस्तक मेला: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशकों की पुस्तकों का एक मेला भी आयोजित किया गया।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: राजनी, अनुराग रतुरी, स्वास्तिक वर्मा और सोम प्रकाश ठाकुर जैसे कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि ऐसी पहल न केवल हमारी पारंपरिक कलाओं को जीवित रखती हैं, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों और शोधकर्ताओं को हिमालयी क्षेत्र की सांस्कृतिक गहराई को समझने में भी मदद करती हैं।

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