कन्या पूजन से बरसेगा धन-धान्य: जानें आयु के अनुसार कन्याओं के नाम और महत्व

Prakriti Singh17 October 20262 min read0 viewsDharm
कन्या पूजन से बरसेगा धन-धान्य: जानें आयु के अनुसार कन्याओं के नाम और महत्व

शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मां दुर्गा की आराधना के साथ ही कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व है। अष्टमी और नवमी तिथि पर श्रद्धालु कन्याओं को देवी का साक्षात स्वरूप मानकर उनका विधि-विधान से पूजन करते हैं। सुपौल के पंडित आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र के अनुसार, कन्या पूजन से सुख-समृद्धि, धन-धान्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

आयु के अनुसार कन्याओं के विभिन्न स्वरूप

शास्त्रों में अलग-अलग आयु की कन्याओं के पूजन के लिए विशिष्ट नाम और उनके पूजन के अलग-अलग फल बताए गए हैं। आचार्य मिश्र ने बताया कि कन्याओं के आयु के आधार पर उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • 2 वर्ष की कन्या: कुमारी
  • 3 वर्ष की कन्या: त्रिमूर्ति
  • 4 वर्ष की कन्या: कल्याणी
  • 5 वर्ष की कन्या: रोहिणी
  • 6 वर्ष की कन्या: कालिका
  • 7 वर्ष की कन्या: चंडिका
  • 8 वर्ष की कन्या: शांभवी
  • 9 वर्ष की कन्या: दुर्गा
  • 10 वर्ष की कन्या: सुभद्रा

धार्मिक मतों के अनुसार, कन्या पूजन में एक वर्ष की आयु वाली कन्या को शामिल नहीं करने तथा दस वर्ष से अधिक आयु वाली कन्याओं के पूजन को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं।

किस स्वरूप की पूजा से क्या मिलता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या के स्वरूप के आधार पर पूजन का फल भी भिन्न होता है:

  • कुमारी स्वरूप: दुख और दरिद्रता के नाश के लिए।
  • त्रिमूर्ति स्वरूप: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों की प्राप्ति तथा धन-धान्य में वृद्धि के लिए।
  • कल्याणी स्वरूप: ऐश्वर्य और यश की प्राप्ति के लिए।
  • कालिका स्वरूप: शत्रुओं को शांत करने के लिए।
  • चंडिका स्वरूप: विभिन्न सिद्धियों की प्राप्ति के लिए।
  • शांभवी स्वरूप: संग्राम में विजय प्राप्त करने के लिए।
  • दुर्गा स्वरूप: मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए।
  • सुभद्रा स्वरूप: शुभ फल की प्राप्ति के लिए।
"नवरात्र में कन्या पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कन्याओं के प्रति श्रद्धा, सम्मान और स्नेह प्रकट करने का अवसर भी है।" - आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र

आचार्य मिश्र ने यह भी जोर देकर कहा कि कन्या पूजन की यह परंपरा नारी शक्ति के सम्मान और देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना से जुड़ी हुई है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका आदर करें और प्रेमपूर्वक उन्हें भोजन कराएं। श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया यह पूजन जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

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