कर्नाटक में बस किराया बढ़ा: AIUTUC ने सरकार को घेरा, कहा- जनता पर बढ़ रहा है बोझ

कर्नाटक सरकार द्वारा बस किराए में की गई बढ़ोतरी के खिलाफ AIUTUC ने मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने इसे जनविरोधी बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की है।

Ghazala Saheb4 November 20262 min read0 viewsBihar
कर्नाटक में बस किराया बढ़ा: AIUTUC ने सरकार को घेरा, कहा- जनता पर बढ़ रहा है बोझ

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार द्वारा बस किराए में की गई भारी बढ़ोतरी के खिलाफ ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC) ने मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'जनविरोधी' करार दिया है और सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

किराए में भारी उछाल, जनता पर आर्थिक बोझ

AIUTUC के राज्य सचिव सोमशेखर यादागिर ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार परिवहन निगमों के घाटे का बहाना बनाकर आम जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने निम्नलिखित बढ़ोतरी की है:

  • राज्य के चार प्रमुख परिवहन निगमों (KSRTC, NWKRTC, KKRTC आदि) के किराए में 23 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
  • बेंगलुरु की BMTC बसों के किराए में 35 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है।

यूनियन का कहना है कि यह फैसला उस समय लिया गया है जब आम नागरिक पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं।

महंगाई की दोहरी मार और बेरोजगारी का संकट

AIUTUC ने इस वृद्धि को मौजूदा कठिन परिस्थितियों में एक बड़ा झटका बताया है। उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में सरकार ने दूध की कीमतों में 4 रुपये प्रति लीटर और दही की कीमतों में 14 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी।

"राज्य में बेरोजगारी चरम पर है। लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए न्यूनतम आय के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। पिछले दस वर्षों में पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतें आसमान छू गई हैं, जबकि मजदूरी न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में बस किराए में वृद्धि करना निंदनीय है।"

यूनियन ने यह भी कहा कि ग्रामीण इलाकों में सूखे की स्थिति ने लोगों के जीवन को और भी दयनीय बना दिया है, ऐसे में यह आर्थिक बोझ असहनीय है।

भ्रष्टाचार और खराब नीतियों का आरोप

AIUTUC ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि परिवहन निगमों में होने वाला घाटा यात्रियों की वजह से नहीं, बल्कि सरकारी भ्रष्टाचार, लीकेज और खराब नीतियों के कारण है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार को इन खामियों को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि यात्रियों पर वित्तीय बोझ डालना चाहिए।

संगठन ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक परिवहन केवल लाभ कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह छात्रों, किसानों, महिलाओं और मजदूरों के दैनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। AIUTUC ने राज्य के कामकाजी लोगों से इस 'जनविरोधी' फैसले के खिलाफ बड़े पैमाने पर जन आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया है।

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