कर्नाटक में सूखे का संकट: हालात का जायजा लेने आएंगी केंद्र की तीन टीमें

Ghazala Saheb28 September 20262 min read3 viewsBihar
कर्नाटक में सूखे का संकट: हालात का जायजा लेने आएंगी केंद्र की तीन टीमें

कर्नाटक में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार राज्य में हालात का जायजा लेने के लिए तीन विशेष टीमों को भेजने जा रही है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी परमेश्वर ने इस महत्वपूर्ण कदम की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार के अनुरोध के बाद केंद्र ने यह निर्णय लिया है।

इन तीन क्षेत्रों में दौरा करेंगी टीमें

डिप्टी सीएम परमेश्वर के अनुसार, केंद्र की ये टीमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जाकर सूखे के प्रभाव का गहराई से आकलन करेंगी। काम के प्रभावी प्रबंधन के लिए टीमों को तीन समूहों में बांटा गया है:

  • पहली टीम: तुमकुरु, चित्रदुर्ग और दावणगेरे क्षेत्र की स्थिति की जांच करेगी।
  • दूसरी टीम: उत्तर कर्नाटक के विभिन्न जिलों का दौरा करेगी।
  • तीसरी टीम: मैसूर क्षेत्र, जिसमें मांड्या, मैसूर और चामराजनगर शामिल हैं, की स्थिति का जायजा लेगी।

जमीनी हकीकत और सरकारी रिपोर्ट का होगा मिलान

ये केंद्रीय टीमें उन सभी तालुकों का दौरा करेंगी जिन्हें राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित घोषित किया है। टीमें न केवल जानकारी जुटाएंगी, बल्कि स्थानीय अधिकारियों और जिला कलेक्टरों (Deputy Commissioners) के साथ विस्तृत चर्चा भी करेंगी।

परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि टीमें यह भी देखेंगी कि राज्य सरकार की रिपोर्ट और जमीनी हकीकत में कोई अंतर तो नहीं है। उन्होंने कहा कि तालुकों को सूखे की श्रेणी में लाने के लिए निर्धारित मानदंडों का ही पालन किया गया है, इसलिए रिपोर्ट और जांच के परिणामों में बड़े अंतर की संभावना बहुत कम है।

"प्राकृतिक आपदाएं किसी राजनीतिक दल के साथ भेदभाव नहीं करतीं। सूखा एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह कर्नाटक के लोगों के हितों से जुड़ा मामला है।" - जी परमेश्वर

अक्टूबर के पहले सप्ताह में सौंपा जाएगा अंतिम ज्ञापन

राज्य सरकार ने पहले ही केंद्र को एक ज्ञापन सौंपा है। चूंकि मानसून की अवधि 30 सितंबर को समाप्त हो रही है, इसलिए सरकार अब नुकसान का विस्तृत विवरण और राहत की मांग वाला एक अंतिम और व्यापक ज्ञापन अक्टूबर के पहले सप्ताह में केंद्र को सौंपने की योजना बना रही है।

सभी दलों को साथ लेकर चलने की अपील

मुख्यमंत्री ने इस गंभीर मुद्दे पर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाने का प्रस्ताव दिया है ताकि केंद्र के समक्ष कर्नाटक की मांगों को एकजुट होकर मजबूती से रखा जा सके। परमेश्वर ने कहा कि यदि भाजपा के नेता इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होते हैं, तो इससे केंद्र सरकार के सामने राज्य का पक्ष और अधिक सशक्त होगा।

उन्होंने आगे कहा कि यदि भाजपा इस पहल में शामिल नहीं होती है, तो भी राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जनता की समस्याओं को केंद्र तक पहुंचाएगी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि केंद्र सरकार राहत देने में विफल रहती है, तो राज्य को एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है, जैसा कि पिछले साल हुआ था। उन्होंने केंद्र से अपील की है कि ऐसी स्थिति पैदा न होने दी जाए।

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