सावधान! इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से नुकसान हो सकता है आपकी गाड़ी को

कर्नाटक के मंत्री रिज़वान अरशद ने चेतावनी दी है कि 20% से अधिक इथेनॉल वाला पेट्रोल वाहनों के इंजन और रबर पार्ट्स को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

Ghazala Saheb6 November 20262 min read0 viewsBihar
सावधान! इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से नुकसान हो सकता है आपकी गाड़ी को

कर्नाटक के मंत्री रिज़वान अरशद ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से नुकसान की चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईंधन में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक होती है, तो यह उन वाहनों के महत्वपूर्ण हिस्सों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है जिन्हें इस उच्च सांद्रता को संभालने के लिए नहीं बनाया गया है।

क्या आपके वाहन सुरक्षित हैं?

मंत्री अरशद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि सरकार ने राज्य के विभिन्न जिलों और सभी प्रमुख तेल कंपनियों से 63 पेट्रोल नमूने एकत्र किए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा वाहनों का बेड़ा इस तरह के उच्च इथेनॉल मिश्रण के लिए तैयार है?

उन्होंने कहा कि भारतीय सड़कों पर मौजूद वाहनों का केवल एक बहुत छोटा हिस्सा ही E20 ईंधन मानकों के अनुरूप बनाया गया है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "यदि हम 2023 के बाद ही E20-अनुपालन वाले वाहन बनाना शुरू कर रहे हैं, तो कुल वाहनों की संख्या में इसका हिस्सा कितना होगा? यह बहुत ही कम है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इथेनॉल का मिश्रण 20 प्रतिशत से ऊपर जाता है, तो ये E20-अनुपालन वाले वाहन भी समस्या का सामना कर सकते हैं।

99 प्रतिशत वाहनों पर मंडरा रहा खतरा

मंत्री ने एक चौंकाने वाला दावा किया कि लगभग 99 प्रतिशत वाहन ऐसे हैं जो 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल सांद्रता वाले ईंधन को सहन नहीं कर सकते। उन्होंने चेतावनी दी कि भले ही ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) वाहनों और इंजनों को प्रमाणित करती है, लेकिन औसत वाहन के लिए यह स्थिति जोखिम भरी है।

"औसत वाहन के लिए, ईंधन प्रणाली के पुर्जे जैसे रबर के हिस्से, होज़, गास्केट, सील और ओ-रिंग्स खराब होने लगेंगे।"

क्यों बढ़ रहा है इथेनॉल का उपयोग?

केंद्र सरकार द्वारा संचालित इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, ईंधन आयात लागत को घटाना और घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम के तहत E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल) को बढ़ावा दिया जा रहा है।

हालांकि, इस पहल ने वाहनों की अनुकूलता, माइलेज और इंजन को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्नाटक सरकार द्वारा पेट्रोल के नमूनों की जांच और मंत्री की इन टिप्पणियों ने अब इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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