कर्नाटक के पेट्रोल में 31% तक इथेनॉल? तेल कंपनियों ने दावों को बताया गलत

कर्नाटक सरकार के 26-31% इथेनॉल वाले दावे को तेल कंपनियों ने खारिज किया है। कंपनियों ने टेस्टिंग प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल।

Ghazala Saheb7 November 20262 min read0 viewsBihar
कर्नाटक के पेट्रोल में 31% तक इथेनॉल? तेल कंपनियों ने दावों को बताया गलत

कर्नाटक पेट्रोल इथेनॉल विवाद को लेकर अब एक बड़ा टकराव सामने आया है। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (OMCs)—इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—ने कर्नाटक सरकार के उन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि राज्य के कुछ रिटेल आउटलेट्स पर बिकने वाले पेट्रोल में 26 से 31 प्रतिशत तक इथेनॉल मिला हुआ है।

BIS मानकों का दिया हवाला

तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि देश भर में आपूर्ति किया जाने वाला E20 पेट्रोल 'ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स' (BIS) के मानक IS 17021 का पूरी तरह पालन करता है। कंपनियों का कहना है कि कर्नाटक सरकार द्वारा किए गए परीक्षणों में वे निर्धारित वैधानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है।

सैंपलिंग प्रक्रिया पर उठाए सवाल

OMCs ने अक्टूबर 2026 के दौरान अपनाई गई सैंपलिंग और टेस्टिंग पद्धति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कंपनियों के अनुसार, इस प्रक्रिया में कई बड़ी खामियां थीं:

  • सैंपलिंग के दौरान तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी नहीं थी।
  • यह प्रक्रिया 'मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल कंट्रोल ऑर्डर, 2005' के निर्धारित नियमों का उल्लंघन करती है।
  • कंपनियों को न तो रिटेंशन सैंपल मिले और न ही आउटलेट-वार विस्तृत लैब रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई।

तकनीकी रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर संदेह

कंपनियों ने तीसरे पक्ष (third-party) की प्रयोगशाला द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्रों पर भी संदेह जताया है। उनका कहना है कि इन प्रमाणपत्रों में आवश्यक तकनीकी विवरणों की भारी कमी है, जिससे परिणामों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना संभव नहीं है।

"रिपोर्ट में केवल 'गैस क्रोमैटोग्राफी द्वारा इथेनॉल %' का उल्लेख है, लेकिन इसमें परीक्षण मानक, डाइल्यूशन प्रक्रिया या उपयोग किए गए संदर्भ सामग्री (reference material) का कोई विवरण नहीं है। इन अनिवार्य जानकारियों के बिना, 26-31% इथेनॉल के आंकड़ों को प्रमाणित नहीं किया जा सकता।"

तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से आग्रह किया है कि वे पूरी सैंपलिंग प्रक्रिया के दस्तावेज, आउटलेट-वार लैब रिपोर्ट और अपनाई गई टेस्ट पद्धति का पूरा विवरण साझा करें ताकि इस मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सके।

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