प्रज्वल रेवन्ना केस: SIT अधिकारियों को मिला गृह मंत्री का सम्मान

प्रज्वल रेवन्ना मामले की जांच करने वाले कर्नाटक SIT अधिकारियों को केंद्रीय गृह मंत्री के सम्मान पदक से नवाजा गया है। मंत्री प्रियंक खरगे ने की सराहना।

Ghazala Saheb2 November 20262 min read0 viewsBihar
प्रज्वल रेवन्ना केस: SIT अधिकारियों को मिला गृह मंत्री का सम्मान

कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री प्रियंक खरगे ने प्रज्वल रेवन्ना केस SIT अधिकारी और जांच दल की जमकर सराहना की है। प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ यौन शोषण के मामलों की जांच करने वाले विशेष जांच दल (SIT) के तीन अधिकारियों को उनकी उत्कृष्ट कार्यप्रणाली के लिए '2026 केंद्रीय गृह मंत्री के सम्मान पदक' से नवाजा गया है।

बिना किसी दबाव के की निष्पक्ष जांच

प्रियंक खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि को साझा करते हुए कहा कि यह कर्नाटक पुलिस विभाग की व्यावसायिकता, ईमानदारी और जांच क्षमताओं की जीत है। उन्होंने कहा कि SIT टीम ने बिना किसी बाहरी प्रभाव या दबाव में आए, प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ बलात्कार के मामलों की प्रभावी ढंग से जांच की और अदालत में ठोस सबूत पेश किए।

इन जांबाज अधिकारियों को मिला सम्मान

इस महत्वपूर्ण मामले की जांच में प्रमुख भूमिका निभाने वाले तीन अधिकारियों को यह सम्मान प्राप्त हुआ है:

  • इंस्पेक्टर शोभा एन.
  • सहायक उप-निरीक्षक के. रत्नाममा
  • हेड कांस्टेबल वाई. बालकृष्ण

खरगे ने बताया कि यह राज्य के पुलिस विभाग के लिए गर्व का विषय है कि कुल सात व्यक्तियों को इस सम्मान के लिए चुना गया है, जिनमें छह पुलिसकर्मी और एक फॉरेंसिक साइंस लैब का अधिकारी शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सम्मान राज्य सरकार द्वारा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा उनकी कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रदान किया गया है।

क्या था प्रज्वल रेवन्ना मामला?

यह पूरी जांच पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ दर्ज यौन शोषण के गंभीर मामलों से जुड़ी है। प्रज्वल रेवन्ना, जो पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते हैं, को अगस्त 2025 में एक घरेलू सहायिका के साथ बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था।

विशेष अदालत ने उन्हें हसन जिले के होलेनरसिपुरा में एक फार्महाउस पर इस अपराध के लिए दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह जांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बीके सिंह के नेतृत्व वाली SIT-CID टीम द्वारा की गई थी, जिसकी सफलता के कारण ही अदालत में सजा सुनिश्चित हो सकी।

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