कटिहार में वज्रपात से बचाव की जंग: 10 दिनों तक घूमेंगे एलईडी सुरक्षा रथ
कटिहार में आकाशीय बिजली से बचाव के लिए 10 दिनों का विशेष जागरूकता अभियान शुरू हुआ। 16 प्रखंडों में एलईडी रथों के जरिए ग्रामीणों को सुरक्षा की जानकारी दी जाएगी।

कटिहार जिले में आकाशीय बिजली (वज्रपात) और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए प्रशासन ने एक बड़ी मुहिम शुरू की है। सोमवार को जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने समाहरणालय परिसर से चार विशेष रूप से सुसज्जित 'वज्रपात सुरक्षा रथों' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को बिजली गिरने के खतरों और उससे बचने के सही तरीकों के प्रति जागरूक करना है।
16 प्रखंडों और 80 संवेदनशील पंचायतों में चलेगा अभियान
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह विशेष जन-जागरूकता अभियान अगले 10 दिनों तक जारी रहेगा। ये एलईडी युक्त रथ जिले के सभी 16 प्रखंडों के अंतर्गत आने वाली 80 चिन्हित संवेदनशील पंचायतों का भ्रमण करेंगे।
इन वाहनों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। वाहनों में स्थापित उच्च गुणवत्ता वाली P6 एलईडी स्क्रीन और साउंड सिस्टम के माध्यम से ग्रामीणों को ऑडियो-विजुअल संदेश दिखाए और सुनाए जाएंगे। इसके जरिए वज्रपात से बचाव, तात्कालिक सावधानियों और सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी ताकि लोग आपदा के समय घबराने के बजाय सही कदम उठा सकें।
आपदा मित्र करेंगे मॉकड्रिल और 'सचेत' ऐप का प्रचार
प्रचार-प्रसार को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए प्रत्येक सुरक्षा रथ के साथ 2 प्रशिक्षित 'आपदा मित्र' तैनात किए गए हैं। ये आपदा मित्र गांव-गांव जाकर निम्नलिखित कार्य करेंगे:
- ग्रामीणों के बीच हैंडबिल्स और पैम्पलेट का वितरण करना।
- गांवों में जाकर मॉकड्रिल का प्रदर्शन करना, जिससे लोग समझ सकें कि आपात स्थिति में सुरक्षित कैसे रहना है।
- ग्रामीणों को वज्रपात की पूर्व चेतावनी प्राप्त करने के लिए मोबाइल में 'सचेत' ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करना।
प्रशासन की महत्वपूर्ण सलाह: आपदा के समय क्या करें?
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश देते हुए कहा कि समय पर सटीक सूचना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा माध्यम है। प्रशासन ने आपदा से बचाव के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं:
- मेघ गर्जन और बारिश के समय खुले खेतों, मैदानों या जलस्रोतों (जैसे नदी या तालाब) के पास बिल्कुल न जाएं।
- पेड़ों, बिजली के खंभों, टावरों और अन्य ऊंची संरचनाओं से तुरंत दूर हट जाएं।
- सुरक्षा के लिए तुरंत किसी पक्के मकान में शरण लें।
- मौसम के पूर्वानुमान और प्रशासनिक चेतावनियों पर लगातार नजर रखें।
इस फ्लैग-ऑफ कार्यक्रम के दौरान अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) फिरोज अख्तर, जिला गोपनीय प्रशाखा के प्रभारी पदाधिकारी अभिषेक कुमार, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी सुश्री रीतिका भारती सहित आपदा प्रबंधन शाखा के कई अन्य अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।