कटिहार: अटके हुए ऋणों पर भड़कीं डीडीसी, बैंकों को दिए सख्त निर्देश
कटिहार में डीडीसी ने बैंकों को पीएम विश्वकर्मा और सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण योजना के लंबित ऋणों को तुरंत निपटाने का निर्देश दिया है।

कटिहार के समाहरणालय स्थित एनआईसी सभागार में आयोजित बैंकिंग समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) डॉ. नेहा कुमारी ने सरकारी योजनाओं के तहत ऋण वितरण में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया। जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी के निर्देशानुसार आयोजित इस बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PMFME) और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की बैंकवार प्रगति की गहन समीक्षा की गई।
पीएमएफएमई योजना: लक्ष्य और उपलब्धि के बीच बड़ा अंतर
बैठक में प्रस्तुत समीक्षा प्रतिवेदन के अनुसार, कटिहार जिले में पीएमएफएमई योजना के तहत ऋण स्वीकृति की रफ्तार काफी धीमी है। योजना के तहत निर्धारित लक्ष्यों और अब तक हुई प्रगति के बीच एक बड़ा अंतर देखा गया है।
- ऋण स्वीकृति: जिले में 261 ऋण स्वीकृति के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक केवल 93 ऋण ही स्वीकृत किए गए हैं।
- ऋण वितरण: 168 ऋण वितरण के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 52 मामलों में ही लाभार्थियों को राशि वितरित हो पाई है।
- औपचारिकीकरण: 449 इकाइयों के औपचारिकीकरण के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक केवल 71 इकाइयों का ही औपचारिकीकरण पूरा किया गया है।
डीडीसी ने बैंक अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि लक्ष्य और उपलब्धि के बीच के इस अंतर को जल्द से जल्द पाटा जाए और ऋण वितरण की प्रक्रिया को तेज किया जाए।
विश्वकर्मा योजना: बैंकों की सुस्ती पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत भी ऋण वितरण में आ रही बाधाओं पर विशेष चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि कई मामलों में ऋण स्वीकृत होने के बाद भी लाभार्थियों को राशि का वितरण नहीं किया गया है, साथ ही कई आवेदन अभी भी लंबित पड़े हैं।
डीडीसी ने प्रमुख बैंकों की स्थिति की बिंदुवार समीक्षा की, जिनमें शामिल हैं:
- भारतीय स्टेट बैंक (SBI)
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
- बैंक ऑफ इंडिया
- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
- केनरा बैंक
उन्होंने संबंधित बैंक समन्वयकों को निर्देश दिया कि वे नियमानुसार लंबित मामलों का तुरंत निष्पादन सुनिश्चित करें, ताकि पारंपरिक कारीगरों और दस्तकारों को पूंजी की कमी के कारण अपने काम में बाधा न आए।
उद्योग केंद्र और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी
डीडीसी डॉ. नेहा कुमारी ने जोर देकर कहा कि जिले में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और पात्र लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए बैंकों और जिला उद्योग केंद्र के बीच निरंतर संवाद और बेहतर समन्वय होना अत्यंत आवश्यक है।
इस समीक्षा बैठक में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक मितेश कुमार शांडिल्य, विभिन्न बैंकों के जिला समन्वयक और उद्योग विभाग के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।