कटिहार का कमाल: बिहार में पहली बार ई-डार-टीएमएस लिंक से मिला कैशलेस इलाज
कटिहार में पहली बार ई-डार विक्टिम आईडी को टीएमएस से लिंक कर पीएम राहत योजना के तहत घायल को तुरंत कैशलेस उपचार दिलाया गया।

कटिहार जिले ने प्रधानमंत्री राहत योजना के क्रियान्वयन में एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिले में पहली बार तकनीकी तालमेल का इस्तेमाल करते हुए 'ई-डार विक्टिम आईडी' को 'टीएमएस आईडी' से सफलतापूर्वक लिंक किया गया है, जिससे सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत 'प्री-अप्रूवल' और पूरी तरह कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकी।
मानवता और प्रशासन की तत्परता ने बचाई जान
यह घटना 3 नवंबर की है, जब मनिया के समीप एक सड़क दुर्घटना में मुन्ना कुमार उरांव गंभीर रूप से घायल हो गए। इस आपातकालीन स्थिति में जिला परिवहन पदाधिकारी डेजी रानी ने तुरंत संवेदनशीलता दिखाई और घायल को एम्बुलेंस के जरिए रेडिएंट अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान राहगीर अंकुर कुमार ने भी मानवता की मिसाल पेश की और घायल के साथ अस्पताल में तब तक डटे रहे जब तक उपचार शुरू नहीं हो गया।
मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए केएमसीएच (KMCH), कटिहार रेफर कर दिया।
तकनीकी तालमेल से मिली त्वरित राहत
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआरएम एनआईसी रूपेश कुमार और मुफस्सिल थाना के अपर थानाध्यक्ष तबरेज़ आलम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रशासन ने बिना समय गंवाए तकनीकी प्रक्रिया को पूरा किया, जिसके मुख्य चरण इस प्रकार रहे:
- सबसे पहले घटनास्थल पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक एक्सीडेंट आईडी बनाई गई।
- पीड़ित का संपूर्ण विवरण दर्ज कर 'ई-डार विक्टिम आईडी' तैयार की गई।
- इसके बाद केएमसीएच में इस आईडी को 'टीएमएस आईडी' से सफलतापूर्वक लिंक किया गया।
- तकनीकी लिंक के माध्यम से इलाज के लिए जरूरी 'प्री-अप्रूवल' तुरंत हासिल कर लिया गया।
विभागों के समन्वय से बना नया मॉडल
इस पूरी प्रक्रिया को धरातल पर उतारने में जिला परिवहन पदाधिकारी, डीआरएम एनआईसी, पुलिस प्रशासन और डीपीसी आयुष्मान भारत के अधिकारियों का सराहनीय योगदान रहा। विभिन्न विभागों के बीच इस बेहतरीन समन्वय ने न केवल पीड़ित को समय पर कैशलेस चिकित्सा सहायता दिलाई, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन के लिए पूरे बिहार के लिए एक नया मॉडल भी पेश किया है।