कटिहार: रबी महाभियान से बढ़ेगी किसानों की आय, जीरो टिलेज है समाधान

कटिहार जिले में रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए 'वासंतिक (रबी) महाभियान–2026' का आगाज किया गया है। गुरुवार को विकास भवन सभागार में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की रणनीति तैयार की गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर खेती को अधिक लाभदायक बनाना है।
वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीक पर जोर
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी, उप विकास आयुक्त डॉ. नेहा कुमारी, अनुमंडल पदाधिकारी डॉ. सूरज कुमार और जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि रबी के मौसम में उत्पादन लागत को कम करने के लिए आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।
डीएम ने विशेष रूप से शून्य जुताई (जीरो टिलेज) तकनीक पर बल दिया। उन्होंने कहा:
"जीरो टिलेज जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने से न केवल खेती की लागत में कमी आती है, बल्कि इससे उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है।"
इसके साथ ही उन्होंने गुणवत्तायुक्त बीज, बीजोपचार, उन्नत किस्मों के चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।
डिजिटल कृषि और सरकारी योजनाओं का लाभ
जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने विभागीय योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन और डिजिटल कृषि के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसानों को डिजिटल सेवाओं का लाभ दिलाने में हर संभव मदद करें। अभियान के तहत निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
- बिहार कृषि ऐप: किसानों को तकनीकी जानकारी और सहायता प्रदान करना।
- किसान कॉल सेंटर: कृषि संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान।
- फार्मर रजिस्ट्री: किसानों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करना।
- PM किसान सम्मान निधि: शत-प्रतिशत ई-केवाईसी (e-KYC) सुनिश्चित करना।
पंचायत स्तर तक पहुंचेगी तकनीक
इस महाभियान की रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए उन्नत कृषि तकनीकों को सीधे पंचायतों और खेतों तक पहुँचाया जाएगा। इसके लिए किसान गोष्ठियों, प्रक्षेत्रीय प्रदर्शनों और डेमो किट के वितरण की योजना बनाई गई है। कृषि समन्वयकों, किसान सलाहकारों और प्रखंड तकनीकी प्रबंधकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित करें और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान निकालें।
अभियान की सफलता के लिए कृषि विभाग के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, सहकारिता, जीविका और नाबार्ड जैसे संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी सहमति बनी है, ताकि किसानों को एकीकृत सहायता मिल सके।