कटिहार के स्कूलों में 'रोबो शाला': अब बच्चे सीखेंगे कोडिंग और रोबोटिक्स
कटिहार के सरकारी स्कूलों में 'रोबो शाला' कार्यक्रम शुरू हुआ। अब बच्चे कोडिंग, रोबोटिक्स और AI जैसी आधुनिक तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान लेंगे।

बिहार के कटिहार जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हुई है। नीति आयोग और अटल इनोवेशन मिशन के सहयोग से जिले के सरकारी स्कूलों के बच्चों को भविष्य की डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करने हेतु 'रोबो शाला' कार्यक्रम का आगाज़ किया गया है।
कुर्सेला में विशेष कार्यशाला का आयोजन
इस कार्यक्रम के तहत जिले के कुर्सेला में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान स्कूली छात्र-छात्राओं को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं दिया गया, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक का व्यावहारिक अनुभव भी कराया गया। कार्यशाला में बच्चों ने निम्नलिखित तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखा और सीखा:
- रोबोटिक्स और कोडिंग: बच्चों ने रोबोट्स को संचालित करना सीखा।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक से परिचय कराया गया।
- 3D प्रिंटर और सेंसर: आधुनिक उपकरणों के माध्यम से विज्ञान के प्रयोग किए गए।
- STEM शिक्षा: साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स पर आधारित प्रोजेक्ट्स।
'डू-इट-योरसेल्फ' पद्धति पर जोर
कार्यशाला के दौरान बच्चों के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने स्वयं सेंसर के जरिए लाइट जलाकर और रोबोट को नियंत्रित कर विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को आसानी से समझ लिया। यह पूरी प्रक्रिया 'डू-इट-योरसेल्फ' (स्वयं करके सीखना) के सिद्धांत पर आधारित थी।
"कटिहार जैसे सीमांचल क्षेत्र के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। 'रोबो शाला' जैसे नवाचारी अभियानों के जरिए अब सरकारी विद्यालयों के बच्चे भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों से सीधे जुड़ सकेंगे।" - जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी
हर प्रखंड में बनेगा 'रोबो शाला क्लब'
जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने इस पहल के भविष्य के लक्ष्यों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले के प्रत्येक प्रखंड में अटल टिंकरिंग लैब की तर्ज पर 'रोबो शाला क्लब' का गठन किया जाए।
नीति आयोग के सहयोग से जिले के चयनित विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से रोबो शाला केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर प्रशिक्षित मेंटर्स की तैनाती की जाएगी, जो छात्रों को नियमित रूप से तकनीकी प्रशिक्षण देंगे। इससे ग्रामीण परिवेश के छात्र भी डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम हो सकेंगे।