केजरीवाल NHRC बस विवाद: पंजाब तीर्थ बसों पर मचा बवाल!

अरविंद केजरीवाल ने NHRC पर पंजाब की तीर्थ बसों को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जिस पर आयोग ने सुरक्षा और भ्रष्टाचार को लेकर पलटवार किया है।

Ghazala Saheb24 October 20262 min read0 viewsBihar
केजरीवाल NHRC बस विवाद: पंजाब तीर्थ बसों पर मचा बवाल!

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और मानवाधिकार आयोग के बीच केजरीवाल NHRC बस विवाद अब एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। यह विवाद पंजाब सरकार की 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' के तहत बुजुर्गों के लिए चलाई जा रही सुपर डीलक्स बसों की सुरक्षा जांच को लेकर शुरू हुआ है।

केजरीवाल का NHRC पर तीखा हमला

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मानवाधिकार आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि NHRC केवल पंजाब की तीर्थ यात्रा बसों को ही निशाना बना रहा है, जबकि अन्य राज्यों के परिवहन बेड़े की जांच नहीं की जा रही है।

"देश की सबसे बड़ी मानवाधिकार संस्था, NHRC, अपने इतिहास में पहली बार बसों की जांच कर रही है। वे कौन सी बसें हैं? पंजाब के लोगों को तीर्थ यात्रा पर ले जाने वाली सुपर डीलक्स बसें। क्या NHRC ने उत्तर प्रदेश रोडवेज या किसी अन्य राज्य की बसों की जांच की है? नहीं! केवल पंजाब की तीर्थ यात्रा बसों की ही जांच की जा रही है।"

केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि बुजुर्गों की तीर्थ यात्रा में बाधा डालना गलत है और इससे बहुत पाप लगेगा।

NHRC का पलटवार: "कमीशन के चक्कर में जान से न खेलें"

केजरीवाल के आरोपों का जवाब देते हुए NHRC के सदस्य प्रियंक कनूंगो ने उन पर करारा प्रहार किया। उन्होंने केजरीवाल को चेतावनी देते हुए कहा, "डरो मत, अरविंद! हमने अभी उन कमिशनों की जांच शुरू नहीं की है जो आपको ये बसें चलाने के बदले मिल रहे हैं।"

कनूंगो ने आरोप लगाया कि केजरीवाल कमीशन के लालच में मासूम नागरिकों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में असुरक्षित बसों के खिलाफ एक व्यापक अभियान का हिस्सा है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप

NHRC ने स्पष्ट किया कि उनकी जांच का आधार सुरक्षा मानक हैं, न कि कोई राजनीतिक एजेंडा। आयोग ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें बताईं:

  • खतरनाक विभाजन: CIRT पुणे के मानकों के अनुसार, स्लीपर बसों में ड्राइवर और यात्रियों के बीच का विभाजन (partition) सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है।
  • आपातकालीन स्थिति में जोखिम: पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जहाँ बसों में पीछे की तरफ आग लगने पर ड्राइवर को पता ही नहीं चला, जिससे बड़ी दुर्घटनाएं हुईं।
  • देशव्यापी कार्रवाई: पिछले एक साल में देशभर में 1,000 से अधिक ऐसी असुरक्षित बसों को सड़क से हटाया गया है या उन्हें सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।

कनूंगो ने अंत में चेतावनी दी कि यदि केजरीवाल के इस 'अराजकतावादी' रवैये के कारण किसी नागरिक की जान खतरे में पड़ती है, तो उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है।

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