किशनगंज: आशा कार्यकर्ता की सूझबूझ ने बचाई मासूम की जान

किशनगंज जिले के बेलवा बस्ती में एक नवजात की जान बचाने में आशा कार्यकर्ता की सतर्कता और सूझबूझ ने बड़ी भूमिका निभाई है। परिवार जिसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर रहा था, उसे आशा कार्यकर्ता ने समय रहते पहचान लिया और बच्चे की जान बच गई।
कैसे पहचान में आई बीमारी?
बेलवा बस्ती निवासी राजेश के घर में जन्मे नवजात ने जन्म के कुछ दिनों बाद दूध पीना कम कर दिया था और वह सामान्य से कहीं अधिक सोने लगा था। परिवार को लगा कि बच्चा शायद कमजोरी की वजह से ऐसा कर रहा है, लेकिन मामला गंभीर था। इसी दौरान नियमित गृह भ्रमण पर पहुंची आशा कार्यकर्ता जोहरा खातून ने बच्चे की स्थिति को सामान्य नहीं माना। उन्होंने तुरंत परिवार को स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की सलाह दी। जांच के बाद आवश्यक उपचार और देखभाल मिलने से बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ और उसकी जान बच गई।
42 दिनों की निगरानी है बेहद जरूरी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे गृह आधारित नवजात देखभाल कार्यक्रम के तहत प्रसव के बाद पहले 42 दिनों तक जच्चा और बच्चा दोनों की नियमित निगरानी की जाती है। इस दौरान आशा कार्यकर्ता निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देती हैं:
- नवजात का स्तनपान,