नन्हे दिल की धड़कन बचाएगी सरकारी योजना, पटना में होगा इलाज

Ghazala Saheb1 October 20262 min read0 viewsBihar
नन्हे दिल की धड़कन बचाएगी सरकारी योजना, पटना में होगा इलाज

किशनगंज के कोचाधामन प्रखंड के रहने वाले नन्हे समसाद आलम के लिए राहत की बड़ी खबर है। जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे इस मासूम को सरकारी मदद के जरिए इलाज के लिए पटना भेजा गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के माध्यम से अब गरीब परिवारों के बच्चों को समय पर इलाज मिल पा रहा है।

सरकारी योजनाओं से मिल रही है नई जिंदगी

इसी पहल के तहत गुरुवार को समसाद आलम को सदर अस्पताल किशनगंज से आईजीआईएमएस (IGIMS) पटना रेफर किया गया है। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बच्चे की आवश्यक जांच की जाएगी और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार आगे का उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। सरकारी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को इलाज के लिए भटकना न पड़े।

कैसे काम करती है आरबीएसके व्यवस्था?

आरबीएसके के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच करती हैं। इस प्रक्रिया के दौरान जन्मजात हृदय रोग समेत विभिन्न गंभीर बीमारियों की पहचान की जाती है। यदि किसी बच्चे में बीमारी की आशंका मिलती है, तो उसे तुरंत आगे की जांच के लिए भेजा जाता है। हृदय रोग की पुष्टि होने के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पर सर्जरी या अन्य आवश्यक उपचार की व्यवस्था की जाती है।

आंकड़ों में सफलता और प्रशासन का संकल्प

स्वास्थ्य विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, जिले में इन योजनाओं का सकारात्मक असर दिख रहा है। वर्ष 2025 में जिले के 16 बच्चों की जन्मजात हृदय रोग के कारण सफलतापूर्वक सर्जरी कराई गई। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक छह बच्चों को उपचार अथवा सर्जरी की सुविधा मिल चुकी है।

जिलाधिकारी नवीन कुमार ने इस मामले पर कहा कि बच्चों में जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान करना बेहद जरूरी है। प्रशासन का पूरा प्रयास है कि जांच में चिन्हित बच्चों को समय पर इलाज मिले और आर्थिक तंगी उनके उपचार में कोई बाधा न बने।

वहीं, सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि आरबीएसके के माध्यम से गंभीर बीमारियों की पहचान कर बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया लगातार जारी है। सरकारी व्यवस्था के तहत जांच से लेकर उपचार तक की पूरी कड़ी को मजबूत किया जा रहा है, ताकि हर बच्चे का भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ हो सके।

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