खुशखबरी: कटे होंठ-तालू के इलाज के लिए पटना भेजे गए दो बच्चे
किशनगंज के दो बच्चों को कटे होंठ और तालू के इलाज के लिए पटना भेजा गया। आरबीएसके योजना के तहत एम्बुलेंस और इलाज की सुविधा पूरी तरह मुफ्त है।

किशनगंज जिले के उन परिवारों के लिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरी है, जो जन्मजात बीमारियों के कारण अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत, कटे होंठ और कटे तालू की समस्या से जूझ रहे दो मासूम बच्चों को सोमवार को पटना भेजा गया।
मुफ्त एम्बुलेंस और विशेषज्ञ उपचार की सुविधा
किशनगंज प्रखंड के दो वर्षीय आकाश मरांडी और पोठिया प्रखंड की 12 वर्षीय सोनिया कुमारी को उपचार के लिए पटना स्थित मेडिवर्सल अस्पताल भेजा गया है। इन परिवारों के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि बच्चों को निःशुल्क एम्बुलेंस की सुविधा प्रदान की गई है, जिससे उन्हें यात्रा के खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ी।
अक्सर देखा जाता है कि जन्मजात समस्याओं से प्रभावित बच्चों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा तक पहुंचना आर्थिक तंगी और दूरी के कारण बहुत कठिन होता है। ऐसे में आरबीएसके के माध्यम से बच्चों की पहचान, उनकी स्क्रीनिंग और उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है।
क्या कहते हैं परिजन और प्रशासन?
सोनिया के पिता अमल कुमार सिंह ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बच्चे का इलाज कराना हर माता-पिता की प्राथमिकता होती है, लेकिन दूर अस्पताल जाने और महंगे इलाज का खर्च उठाना बहुत मुश्किल था। सरकारी सुविधा और मुफ्त एम्बुलेंस मिलने से उन्हें काफी सहारा मिला है।
"बच्चों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। आर्थिक कठिनाई किसी भी बच्चे के उपचार में बाधा नहीं बननी चाहिए।" — नवीन कुमार, जिलाधिकारी
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी और डीपीएम डॉ. मुनाजिम ने भी इस बात पर जोर दिया कि आरबीएसके के तहत चिह्नित बच्चों को आवश्यक चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने का प्रयास निरंतर जारी है। उन्होंने स्क्रीनिंग और मुफ्त परिवहन को गरीब परिवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
विशेष शिविर अभियान का आयोजन
बता दें कि जिले में कटे होंठ, कटे तालू और जीभ की गांठ जैसी समस्याओं की पहचान और उनके उपचार के लिए 2 अक्टूबर से 14 नवंबर तक एक विशेष शिविर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक बहादुरगंज प्रखंड के बिराज कुमार ठाकुर और कोचाधामन प्रखंड के निसार बाबू को भी उपचार के लिए पटना भेजा जा चुका है।