किशनगंज के 3 बच्चों को जीवनदान: बाल हृदय योजना से अहमदाबाद में मुफ्त हार्ट सर्जरी
बिहार सरकार की बाल हृदय योजना के तहत किशनगंज के तीन बच्चों को अहमदाबाद में मुफ्त ओपन-हार्ट सर्जरी के लिए भेजा गया है।

किशनगंज के तीन मासूम बच्चों के लिए राहत की बड़ी खबर है। बिहार सरकार की 'बाल हृदय योजना' के तहत रागिनी कुमारी, सुहेब और आरती कुमारी को अहमदाबाद में मुफ्त ओपन-हार्ट सर्जरी के लिए भेजा जा रहा है। इन बच्चों के परिवारों के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि हृदय रोग का इलाज बेहद महंगा और जटिल होता है।
अहमदाबाद के श्री सत्य साईं हार्ट अस्पताल में होगा इलाज
इन तीनों बच्चों का इलाज अहमदाबाद के प्रसिद्ध श्री सत्य साईं हार्ट अस्पताल में किया जाएगा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और बिहार सरकार की बाल हृदय योजना के समन्वय से यह पूरी प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, रागिनी कुमारी और सुहेब को किशनगंज सदर अस्पताल से डॉ. मोहम्मद नदीम की देखरेख में एम्बुलेंस के जरिए पटना स्थित राज्य स्वास्थ्य समिति भेजा गया है। वहीं, आरती कुमारी ट्रेन से पटना पहुँच रही हैं। पटना में सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, इन तीनों बच्चों को हवाई जहाज से अहमदाबाद ले जाया जाएगा।
सरकार उठाएगी इलाज और यात्रा का पूरा खर्च
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार इन बच्चों के इलाज के साथ-साथ हवाई यात्रा और अन्य सभी खर्चों का वहन कर रही है।
"इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को महंगे निजी अस्पतालों में हृदय सर्जरी के भारी खर्च से मुक्ति मिलेगी, जिससे उन्हें कर्ज के जाल में फंसने से बचाया जा सकेगा।"
किशनगंज के सिविल सर्जन ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि धन के अभाव में किसी भी बच्चे का इलाज न रुके। जिला मजिस्ट्रेट नवीन कुमार ने भी स्पष्ट किया कि बच्चों के स्वास्थ्य और उनके भविष्य को सुरक्षित करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
RBSK के जरिए समय पर पहचान और उपचार
इन बच्चों तक मदद पहुँचने के पीछे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह कार्यक्रम आंगनवाड़ी केंद्रों, सरकारी स्कूलों और सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों की नियमित जांच करता है ताकि बीमारियों का समय पर पता चल सके।
- स्क्रीनिंग: जन्मजात दोषों और स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करना।
- रेफरल: जरूरतमंद बच्चों को उचित चिकित्सा सहायता के लिए उच्च केंद्रों पर भेजना।
- समन्वय: स्क्रीनिंग से लेकर अंतिम उपचार तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन।
इस व्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि रागिनी, सुहेब और आरती जैसे बच्चों को उच्च स्तरीय चिकित्सा देखभाल मिल सके और वे एक स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ सकें।