किशनगंज के तीन मासूमों को मिलेगा नया जीवन, अहमदाबाद में होगी सर्जरी
किशनगंज के तीन मासूमों को जन्मजात हृदय रोग से मिलेगी राहत। सरकारी योजना के तहत अहमदाबाद में मुफ्त ओपन हार्ट सर्जरी कराई जाएगी।

किशनगंज के तीन नन्हे बच्चों के लिए अब अंधेरा छंट रहा है और जीवन की नई उम्मीद जगी है। जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे रागिनी कुमारी, सुहेब और आरती कुमारी के परिवारों के लिए सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही हैं। आर्थिक तंगी के कारण जो परिवार निजी अस्पतालों में लाखों रुपये का खर्च उठाने में असमर्थ थे, अब उनके बच्चों का इलाज सरकारी मदद से होगा।
सरकारी योजनाओं से मिली संजीवनी
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और बाल हृदय योजना के माध्यम से इन मासूमों के जीवन को बचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इन तीनों बच्चों का मुफ्त ओपन हार्ट सर्जरी अहमदाबाद के प्रसिद्ध श्री सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल में किया जाएगा। विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में होने वाली इस सर्जरी से बच्चों को हृदय रोगों से निजात मिलेगी।
पटना से अहमदाबाद तक का सफर
इलाज के लिए बच्चों को भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। डीपीएम डॉ. मुनाजिम के अनुसार, मंगलवार को रागिनी कुमारी और सुहेब को किशनगंज सदर अस्पताल से एंबुलेंस के जरिए राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना के लिए रवाना कर दिया गया। उनके साथ डॉ. मोहम्मद नदीम भी मौजूद रहे। वहीं, तीसरी बच्ची आरती कुमारी ट्रेन के जरिए पटना पहुंचेंगी।
सबसे खास बात यह है कि पटना पहुंचने के बाद इन तीनों बच्चों को हवाई जहाज से अहमदाबाद भेजा जाएगा। इस पूरी यात्रा, हवाई सफर और अस्पताल के इलाज का सारा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली है। निजी अस्पतालों में इस तरह की जटिल सर्जरी का खर्च उठाना इन परिवारों के लिए मुमकिन नहीं था।
प्रशासन का संकल्प: कोई बच्चा इलाज से वंचित न रहे
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि बाल हृदय योजना का मुख्य उद्देश्य ही जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को विशेषज्ञ अस्पतालों में बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। वहीं, जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि आर्थिक कमजोरी किसी भी बच्चे के उपचार में बाधा नहीं बननी चाहिए।
प्रशासन की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों, सरकारी स्कूलों और स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग की जा रही है ताकि गंभीर बीमारियों की पहचान समय पर हो सके। अब इन तीनों परिवारों की निगाहें केवल इस उम्मीद में टिकी हैं कि उनके बच्चे जल्द ही सफल सर्जरी के बाद स्वस्थ होकर घर लौटें।