किशनगंज के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी, सांसद ने उठाई मांग

किशनगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के रिक्त पदों की समस्या अब एक गंभीर संकट बनती जा रही है। इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए किशनगंज के सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री को एक बार फिर पत्र लिखकर रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति और पदस्थापन की मांग की है।
मरीजों के लिए बढ़ा संकट
सांसद ने अपने पत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में डॉक्टरों के पद खाली होने के कारण मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद के अनुसार, स्थानीय केंद्रों में डॉक्टर न होने की वजह से मरीजों को इलाज के लिए जिला मुख्यालय या फिर महंगे निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है।
इसका सबसे बुरा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है, जो पूरी तरह से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं। समय पर डॉक्टर न मिलने से उनकी सेहत और जेब दोनों पर भारी बोझ बढ़ रहा है।
पहले भी उठा चुके हैं यह मुद्दा
सांसद की यह मांग पहली बार नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर निरंतर सरकार पर दबाव बनाया है:
- 29 मई 2026: सांसद ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर चिकित्सकों की कमी दूर करने का आग्रह किया था।
- अप्रैल 2026: किशनगंज जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को लेकर उन्होंने सवाल खड़े किए थे।
सांसद ने बताया कि पूर्व में स्वास्थ्य मंत्री ने किशनगंज के आवश्यक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक अपेक्षित पदस्थापन नहीं हुआ है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
जल्द समाधान की मांग
डॉ. जावेद आजाद ने स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि किशनगंज लोकसभा क्षेत्र के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में स्वीकृत और रिक्त पदों की तत्काल समीक्षा की जाए। उन्होंने मांग की है कि चिकित्सकों, एएनएम और अन्य आवश्यक स्वास्थ्यकर्मियों की शीघ्र पदस्थापना सुनिश्चित की जाए।
सांसद ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उनके घर के पास ही बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है और वे इस मुद्दे को संबंधित विभाग के समक्ष लगातार उठाते रहेंगे।