किशनगंज DRDA कर्मियों का अल्टीमेटम: 17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

किशनगंज के DRDA संविदा कर्मियों ने वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की मांग को लेकर 17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है।

Ghazala Saheb30 October 20262 min read0 viewsBihar
किशनगंज DRDA कर्मियों का अल्टीमेटम: 17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

किशनगंज के जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) के संविदा कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। साल 2007 से प्रशासन के तहत अपनी सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे 17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे और सामूहिक अवकाश लेंगे।

तीन प्रमुख मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई

DRDA के संविदा कर्मियों ने मुख्य रूप से तीन मांगों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है। इन कर्मचारियों की मांग है कि:

  • उनके वेतन में सम्मानजनक वृद्धि की जाए।
  • पिछले कई महीनों से बकाया पड़े वेतन का तुरंत भुगतान किया जाए।
  • उनकी सेवाओं को नियमित (Regularization) किया जाए।

इस संबंध में, 28 अक्टूबर को बिहार भर के DRDA कर्मचारियों ने पटना में ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से मुलाकात की थी। इसके बाद, शुक्रवार को कर्मचारियों ने अपनी मांगों से संबंधित एक औपचारिक ज्ञापन जिला विकास आयुक्त (DDC) को भी सौंपा।

15 दिन का अल्टीमेटम और हड़ताल की तैयारी

कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि प्रमोद कुमार ने बताया कि पटना में हुई चर्चा के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर 15 दिनों के भीतर ठोस निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस समय सीमा के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो किशनगंज सहित पूरे बिहार के DRDA संविदा कर्मी 17 नवंबर से काम बंद कर देंगे।

8 महीने से वेतन का इंतजार और मानदेय में ठहराव

कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। प्रमुख कर्मचारियों—प्रमोद कुमार, दीपक गुप्ता, राजन मिश्रा, संजय सिंह, अजय कुमार सिंह और दीपक कुमार साहा ने बताया कि उन्हें पिछले 8 महीनों से वेतन नहीं मिला है। इतना ही नहीं, साल 2017 के बाद से उनके मानदेय में कोई वृद्धि भी नहीं की गई है, जिससे उनके सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है।

नियमितीकरण पर सरकार की चुप्पी और केंद्र के आदेश की अनदेखी

कर्मचारियों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल, 2022 को ही निर्देश जारी कर दिया था कि DRDA के प्रशासनिक प्रमुख को भंग किया जाए और कर्मचारियों को अन्य विभागों में समायोजित किया जाए। लेकिन, बिहार ग्रामीण विकास विभाग पिछले पांच वर्षों से इस नियमितीकरण की प्रक्रिया पर कोई ठोस निर्णय लेने में विफल रहा है।

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