बायसी में परीक्षा केंद्र से छात्र परेशान, किशनगंज में केंद्र की मांग

किशनगंज के छात्र-छात्राओं ने बायसी में परीक्षा केंद्र होने पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर केंद्र बनाने की मांग की है।

Ghazala Saheb29 October 20262 min read0 viewsBihar
बायसी में परीक्षा केंद्र से छात्र परेशान, किशनगंज में केंद्र की मांग

किशनगंज जिले के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा की तैयारी अब एक बड़ी चुनौती बन गई है। मारवाड़ी कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने परीक्षा केंद्र के रूप में पूर्णिया जिले के बायसी को चुने जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विद्यार्थियों ने कॉलेज परिसर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करते हुए मांग की है कि किशनगंज परीक्षा केंद्र स्थानीय स्तर पर ही बनाया जाए।

65 किलोमीटर का सफर और आर्थिक बोझ

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि किशनगंज से बायसी की दूरी लगभग 65 किलोमीटर है। इतनी लंबी दूरी तय करके परीक्षा देने जाने में न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि भारी आर्थिक बोझ भी पड़ता है। विद्यार्थियों के अनुसार, आने-जाने के किराए और यात्रा की व्यवस्था को लेकर परीक्षा के दौरान मानसिक तनाव बना रहता है, जिससे उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

विद्यार्थियों ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा कि छात्राओं के लिए दूर स्थित परीक्षा केंद्र तक पहुंचना और परीक्षा समाप्त होने के बाद सुरक्षित घर लौटना एक बड़ी चुनौती है। इस बात को लेकर अभिभावकों में भी काफी चिंता देखी जा रही है। छात्रों का तर्क है कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में उन्हें यात्रा की परेशानियों के बजाय केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलना चाहिए।

प्रशासन से स्थानीय केंद्र की अपील

छात्रों ने संबंधित अधिकारियों और शिक्षा विभाग से अपील की है कि किशनगंज जिले के विद्यार्थियों के लिए स्थानीय स्तर पर ही परीक्षा केंद्र निर्धारित किया जाए। उनका मानना है कि यदि केंद्र किशनगंज में ही होगा, तो इससे कई समस्याओं का समाधान होगा:

  • विद्यार्थियों का अनावश्यक यात्रा का खर्च कम होगा।
  • समय की बचत होगी और छात्र बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
  • छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और अभिभावकों की चिंता कम होगी।

धरना-प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाई है और मांग की है कि इस समस्या पर गंभीरता से विचार किया जाए ताकि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।

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